जेवरा के बच्चों को भी मिले दिल्ली जैसा अवसर; भाजपा नेता दिलेन्द्र कौशिल की पहल, केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव से मिलकर एकलव्य विद्यालय की मजबूत पैरवी

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। मस्तूरी विकासखंड के आदिवासी बहुल ग्राम पंचायत जेवरा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नई रोशनी जलाने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। भाजपा नेता दिलेन्द्र कौशिल ने नई दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव से मुलाकात की और जेवरा में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) की स्थापना की जोरदार मांग रखी।
जेवरा के आदिवासी बच्चों को अब अवसर से वंचित नहीं रहने देंगे : दिलेन्द्र कौशिल
मंत्री से हुई विस्तृत चर्चा के दौरान कौशिल ने कहा कि जेवरा और आसपास का पूरा क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य है, जहां प्रतिभा तो भरपूर है, लेकिन संसाधनों और उच्च स्तरीय शैक्षणिक सुविधाओं की कमी साफ दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि अगर सरकार जेवरा में एकलव्य विद्यालय की स्वीकृति देती है तो यह केवल एक भवन नहीं होगा, बल्कि हजारों आदिवासी बच्चों के सपनों का विश्वविद्यालय साबित होगा। हमारे बच्चे भी डॉक्टर, इंजीनियर, पीएससी और यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में आगे बढ़ सकते हैं — उन्हें बस सही मंच चाहिए।
गांव के बच्चों को शहर जैसी सुविधा — शिक्षा से बदलेगी तस्वीर
कौशिल ने बताया कि एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को निशुल्क आवास, भोजन, आधुनिक शिक्षा, स्मार्ट कक्षाएं, खेल सुविधाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं की विशेष कोचिंग उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने कहा कि जेवरा में इस विद्यालय की स्थापना से मस्तूरी ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इससे पलायन रुकेगा और गांवों में शिक्षा का स्तर नई ऊंचाई पर पहुंचेगा।
केंद्रीय मंत्री का आश्वासन, प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश
मंत्री जुएल उरांव ने कौशिल की मांग को गंभीरता से सुना और सकारात्मक आश्वासन दिया। उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्रस्ताव अग्रेषित करते हुए आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय स्तर पर इस प्रस्ताव पर तकनीकी एवं प्रशासनिक परीक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
यह राजनीति नहीं, पीढिय़ों के भविष्य की लड़ाई है — कौशिल
भाजपा नेता दिलेन्द्र कौशिल ने कहा यह किसी दल या व्यक्ति का मुद्दा नहीं है, यह हमारी आने वाली पीढिय़ों के भविष्य की लड़ाई है। जब तक जेवरा के बच्चों को बराबरी का शैक्षणिक अवसर नहीं मिलेगा, तब तक हमारा प्रयास जारी रहेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन मिलकर इस मांग को और मजबूत करेंगे।
क्षेत्र में उत्साह, ग्रामीणों ने जताई उम्मीद
जेवरा और आसपास के ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि जल्द ही विद्यालय को स्वीकृति मिलेगी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह विद्यालय स्थापित होता है तो आदिवासी समाज के बच्चों के लिए यह ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।
शिक्षा की नई सुबह की ओर बढ़ता जेवरा
यदि केंद्र सरकार से मंजूरी मिलती है तो जेवरा में एकलव्य विद्यालय की स्थापना मस्तूरी क्षेत्र के शैक्षणिक इतिहास में मील का पत्थर साबित हो सकती है। यह पहल न केवल शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाएगी, बल्कि आदिवासी युवाओं को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में ठोस कदम होगी।



