छत्तीसगढ़

एनटीपीसी सीपत संयंत्र में भीषण हादसा: मजदूर की मौत, चार घंटे चक्काजाम

ग्रामीणों का फूटा आक्रोश, मुआवजे की लंबी लड़ाई के बाद समझौता

सीपत (हिमांशु गुप्ता) । एनटीपीसी सीपत प्लांट की यूनिट-5 में बुधवार दोपहर मेंटेनेंस के दौरान हुआ बड़ा हादसा एक मजदूर की जान ले गया और कई घायल हो गए। गोरखपुर की ठेका कंपनी द्वारा कराए जा रहे ओवर आइलिंग कार्य के दौरान अचानक प्री एयर हीटर का प्लेटफार्म टूट गया, जिससे लगभग 21 मीटर ऊंचाई से मजदूर नीचे गिर पड़े।
इस दर्दनाक हादसे में ग्राम पोड़ी निवासी 27 वर्षीय श्याम साहू की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल होकर अपोलो अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है। तीन अन्य मजदूरों का इलाज एनटीपीसी अस्पताल में जारी है। मौत की सूचना से गांव में कोहराम मच गया। गुस्साए ग्रामीणों ने हजारों की संख्या में मटेरियल गेट पर पहुंचकर चक्का जाम कर दिया। चार घंटे तक सडक़ ठप रही, ग्रामीणों ने मुआवजा, नौकरी और पेंशन की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की।
मृतक की दो वर्षीय मासूम बेटी अब पिता की छाया से वंचित हो गई। स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए एनटीपीसी प्रबंधन, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस व जनप्रतिनिधियों ने मृतक के परिजनों से बैठक की। करीब 7 घंटे के गतिरोध के बाद समझौता हुआ, जिसमें तय किया गया कि— मृतक की पत्नी को 60 वर्ष की उम्र तक पेंशन , पत्नी को एनटीपीसी में नौकरी , 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता एक सप्ताह में , 50 हजार रुपए की तत्काल मदद , इसके बाद ग्रामीणों ने चक्का जाम समाप्त किया। हादसे में सेफ्टी विभाग की लापरवाही उजागर हुई है, जिसे लेकर मजदूरों में भी भारी आक्रोश है। घटना की पुष्टि होते ही एनटीपीसी प्रबंधन ने देर शाम प्रेस विज्ञप्ति जारी की।

विधायक लहरिया ने हॉस्पिटल पहुंचकर जाना घायलों का हाल

विधायक दिलीप लहरिया ने अपोलो अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल लिया और एनटीपीसी प्रबंधन व ठेका कंपनी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने ठेका कंपनी पर अपराध दर्ज करने, प्रशासनिक जांच कराने और मृतकों के परिजन को 50 लाख की मुआवजा राशि व नौकरी देने की मांग की।

घटना स्थल पर इन प्रमुखों की उपस्थिति रही —

प्रबंधन से शैलेश चौहान, प्रवीण भारती, एसडीएम प्रवेश पैकरा, तहसीलदार सोनू अग्रवाल, पुलिस अधिकारी गगन सर, जनप्रतिनिधि चंद्रप्रकाश सूर्या, मनोज खरे, राजेंद्र धीवर, सूरज शेष (सरपंच पोड़ी) सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण।

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