बूंद-बूंद पानी के संघर्ष से जल संरक्षण की मिसाल तक पहुंचा पाराडोल का बैगा पारा
जल जीवन मिशन ने बदली ग्रामीणों की जिंदगी, घर तक पहुंचा पानी तो महिलाओं और बुजुर्गों को मिली बड़ी राहत

रायपुर/05 अगस्त। पानी के लिए कभी लंबी दूरी तय करना एमसीबी पाराडोल के बैगा पारा के ग्रामीणों की रोजमर्रा की मजबूरी थी। गर्मी हो या बरसात, पेयजल के लिए हैंडपंप, नदी और कुओं का सहारा लेना पड़ता था। पानी लाने में घंटों समय और काफी मेहनत लगती थी। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह परेशानी और भी अधिक कठिन थी। लेकिन आज इसी बैगा पारा की तस्वीर बदल चुकी है। जल जीवन मिशन ने यहां पानी की समस्या को दूर करने के साथ ग्रामीण जीवन में सुविधा, स्वच्छता और जागरूकता की नई शुरुआत की है।
पाराडोल के बैगा पारा में कुछ समय पहले तक घर के उपयोग के लिए पानी जुटाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती था। पेयजल के लिए दूर स्थित जल स्रोतों पर निर्भरता के कारण ग्रामीणों को रोजाना काफी समय पानी लाने में लगाना पड़ता था। पानी ढोने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से महिलाओं और परिवार के बुजुर्ग सदस्यों पर रहती थी। पानी की इस समस्या का असर केवल रोजमर्रा के जीवन पर ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों के समय और श्रम पर भी पड़ता था। गांव में पेयजल की स्थायी व्यवस्था की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित जल जीवन मिशन के माध्यम से बैगा पारा में पेयजल व्यवस्था को मजबूत किया गया। गांव में जल स्रोत विकसित करने के साथ हैंडपंप की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा 10 हजार लीटर क्षमता की पानी टंकी स्थापित की गई है, जिसमें मोटर पंप के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है। गांव में पाइपलाइन बिछाकर पेयजल वितरण व्यवस्था को घरों तक पहुंचाया गया। अब ग्रामीणों को पानी के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। घर के पास ही पानी उपलब्ध होने से रोजमर्रा के काम आसान हुए हैं और ग्रामीणों के समय व श्रम की बचत हो रही है।
जल जीवन मिशन की सुविधा का सबसे बड़ा असर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में दिखाई दे रहा है। पहले पानी लाने में लगने वाला समय और मेहनत अब बच रही है। इससे महिलाएं घर-परिवार के दूसरे कार्यों के साथ-साथ अपनी आजीविका और बच्चों की देखभाल पर अधिक समय दे पा रही हैं। बुजुर्गों के लिए भी यह सुविधा राहत लेकर आई है। पानी के लिए लंबी दूरी तय करने और भारी बर्तन उठाकर लाने की परेशानी कम हुई है। ग्रामीणों के लिए नल और पाइपलाइन से जुड़ी पेयजल व्यवस्था अब सुविधा के साथ-साथ बेहतर जीवन की पहचान बन रही है।
जल जीवन मिशन से गांव में केवल पेयजल की उपलब्धता ही नहीं बढ़ी, बल्कि जल संरक्षण और स्वच्छता को लेकर सामुदायिक जागरूकता भी मजबूत हुई है। ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति की सक्रिय निगरानी तथा ग्रामीणों की सहभागिता से जल स्रोतों की देखरेख, साफ-सफाई और पानी के उचित उपयोग को लेकर लोगों में जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई है। ग्रामीण अब समझ रहे हैं कि पानी केवल सुविधा नहीं, बल्कि आने वाली पीढिय़ों की जरूरत भी है। इसलिए उपलब्ध जल का संरक्षण और उसका विवेकपूर्ण उपयोग गांव की सामूहिक जिम्मेदारी बनता जा रहा है।
पाराडोल का बैगा पारा यह दिखाता है कि जब सरकारी योजना, विभागीय प्रयास और ग्रामीणों की सहभागिता एक साथ जुड़ते हैं, तो बदलाव केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों के जीवन में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन लाता है। कभी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करने वाला बैगा पारा आज घर तक पेयजल की सुविधा और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता के साथ नई राह पर आगे बढ़ रहा है। जल जीवन मिशन ने यहां सिर्फ पाइपलाइन और पानी की टंकी नहीं पहुंचाई, बल्कि ग्रामीणों के जीवन में सुविधा, स्वच्छता, समय की बचत और बेहतर भविष्य की उम्मीद भी पहुंचाई है। पाराडोल का बैगा पारा अब यही संदेश दे रहा है जब घर तक पानी पहुंचता है, तो सिर्फ प्यास नहीं बुझती, जिंदगी भी बदलती है।



