राजधानी

नक्सलवाद से मिले घावों पर मरहम लगाकर हर पीडि़त को सम्मानपूर्ण जीवन देना हमारा संकल्प : केंद्रीय गृह मंत्री शाह

नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हँसता-खेलता और खुशहाल बनाना है : अमित शाह

रायपुर, 15 अक्टूबर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद अब उससे मिले घावों पर मरहम लगाना, पीडि़तों का पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। नक्सलवाद ने पाँच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। अब हमें नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हँसता-खेलता, खुशहाल और समृद्ध बनाना है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्रत्येक दिव्यांगजन और नक्सली हिंसा से प्रभावित व्यक्ति के पुनर्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस संकल्प को पूरा करने में भारत सरकार छत्तीसगढ़ सरकार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में सेवा और समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत दंतेवाड़ा में आयोजित नि:शुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित तीन दिवसीय शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों के कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं विभिन्न सहायक उपकरणों से लाभान्वित किया जाएगा। इनमें दंतेवाड़ा जिले के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 दिव्यांगजन शामिल हैं। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर तथा सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा से प्रभावित दिव्यांग आदिवासी भाई-बहनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण प्रदान कर उनके जीवन को सुगम बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 5 से 7 अक्टूबर 2026 के दौरान जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। इनमें अकेले बस्तर के 1,570 से अधिक लाभार्थी थे। यह संख्या बस्तर की उस पीड़ा का परिचय देती है, जिसे यहाँ के गरीब और आदिवासी परिवारों ने दशकों तक सहन किया है।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि नक्सलियों ने आईईडी विस्फोटों के माध्यम से निर्दोष नागरिकों को दिव्यांग बनाया। इससे बड़ा मानवाधिकारों का हनन कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 31 मार्च 2026 से पहले देश से नक्सलवाद समाप्त करने का दृढ़ संकल्प लिया था और आज नक्सलवाद समाप्त हो चुका है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि केवल नक्सलवाद समाप्त कर देने से पाँच दशकों की पीड़ा समाप्त नहीं होगी। हमें इन घावों पर मरहम लगाना होगा। नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करना होगा और उनके सम्मानपूर्वक जीवनयापन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
उन्होंने कहा कि दिव्यांग भाई-बहनों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र, स्मार्ट वॉकिंग स्टिक और कृत्रिम अंग जैसे उपकरण उपलब्ध कराकर उनके जीवन में नई खुशियाँ लाई जा सकती हैं। इस सेवा कार्य में छत्तीसगढ़ सरकार, जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग, भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और भारतीय जैन संघ सहित अनेक संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व के सहयोग की भी सराहना करते हुए कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष और बस्तर में सकारात्मक परिवर्तन लाने के प्रयासों में स्थानीय जनजातीय समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर में शांति और विकास की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम, नियद नेल्ला नार और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना जैसी पहलों के माध्यम से बस्तर को फिर से हँसता-खेलता बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि जिस बस्तर में कभी गोलियों और बम धमाकों की आवाजें सुनाई देती थीं तथा भय का वातावरण रहता था, वहाँ आज हजारों युवा खेलों में भाग ले रहे हैं और अपनी परंपराओं को जीवित रख रहे हैं। बस्तर ओलंपिक ने युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया है। वहीं बस्तर पंडुम के माध्यम से जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को पुनर्जीवित करने का बड़ा प्रयास हुआ है।
श्री शाह ने कहा कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाई जा रही हैं। पाँच दशकों तक जिन क्षेत्रों तक आवश्यक सुविधाएँ नहीं पहुँच सकीं, वहाँ अब आधारभूत अधोसंरचना और जनकल्याणकारी योजनाओं का विस्तार हो रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और विकास की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों के बैंक खाते नहीं थे, ऐसे 7,328 लोगों के बैंक खाते खोले गए हैं। 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। इसी प्रकार 455 लोगों को नौकरी दी गई है और 129 लोगों को भूमि का आवंटन किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि वे रोजगार और स्वरोजगार से जुडक़र आत्मनिर्भर बन सकें।
केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए हैं और 2,808 परिवारों को नि:शुल्क बिजली उपलब्ध कराई गई है। क्षेत्र में आवागमन और संपर्क सुविधाओं के विस्तार के लिए 372 नई सडक़ परियोजनाएँ प्रारंभ की गई हैं तथा 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 48,526 लोगों के आधार कार्ड बनाए गए हैं और इलवाद पंचायत पुरस्कार के अंतर्गत 44 पंचायतों को पुरस्कृत किया गया है।
श्री शाह ने कहा कि ये प्रयास नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोडऩे तथा उनके जीवन में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बस्तर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान 500 से अधिक सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए थे। इनमें से 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को अब ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन शिविरों में कभी सुरक्षा बलों के जवान बैठकर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते थे, उन्हीं स्थानों पर अब भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारी बैठकर विकसित बस्तर की नींव रखेंगे। श्री शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि इन सार्वजनिक सेवा केंद्रों के माध्यम से बस्तर में विकास और जनकल्याण के कार्यों को नई गति मिलेगी तथा विकसित बस्तर के निर्माण का संकल्प साकार होगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति से छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद की दशकों पुरानी चुनौती से मुक्ति मिली है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि हमारे वीर सुरक्षा बलों के अदम्य साहस, पराक्रम और बलिदान तथा बस्तर की जनता के सहयोग से संभव हुई है।
मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों तथा नक्सली हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था, जब यह विश्वास करना कठिन लगता था कि छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो पाएगा। लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से आज हमने यह लक्ष्य प्राप्त किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता और विशेष रूप से बस्तरवासियों की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध इस निर्णायक लड़ाई में बस्तर की जनता ने सुरक्षा बलों का भरपूर सहयोग किया। यहाँ के लोग भय और हिंसा से मुक्ति चाहते थे। वे शांति, सुरक्षा और विकास की मुख्यधारा से जुडऩा चाहते थे। जनता के इसी विश्वास और सहयोग ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की दौड़ में पीछे रह गया। अब समय आ गया है कि इस क्षेत्र को तेज गति से विकास के पथ पर आगे बढ़ाया जाए। हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर को देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में अग्रणी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का भरोसा दिलाया है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से इस लक्ष्य को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से बस्तर के उन दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुँचा रही है, जो दशकों तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे। उन्होंने बताया कि आज 500 से अधिक गाँवों में सडक़ और बिजली की सुविधाएँ पहुँची हैं। घरों तक नल से जल पहुँचाने और दूरसंचार सुविधाओं के विस्तार का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए अस्पतालों की व्यवस्था की जा रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से दूरस्थ अंचलों के बच्चों, महिलाओं और परिवारों को बेहतर अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहले अनेक गाँवों के लोगों के राशन कार्ड तक नहीं बन पाते थे। राशन प्राप्त करने के लिए उन्हें कई दिनों तक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब गाँवों में ही राशन दुकानों की व्यवस्था कर लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का प्रयास है कि बस्तर के अंतिम गाँव और अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुँचे। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, सडक़, बिजली, पेयजल और संचार सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित सुरक्षा शिविरों ने शांति और सुरक्षा का वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब इन शिविरों को सेवा और विकास के केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि खाली हो रहे सुरक्षा शिविरों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में परिवर्तित करना राज्य सरकार का महत्वपूर्ण संकल्प है। इन केंद्रों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण और आजीविका संबंधी गतिविधियाँ संचालित की जाएँगी, ताकि युवाओं और ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें।
मुख्यमंत्री ने बताया कि महान जननायक शहीद वीर गुंडाधुर के गाँव नेतानार में पहला सेवा डेरा प्रारंभ किया गया है। यहाँ स्थानीय लोगों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही बस्तर के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी आजीविका गतिविधियाँ भी प्रारंभ की गई हैं।
सुकमा जिले के दिव्यांग पुलिस जवान मडक़ाम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायाँ पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके कारण पैर काटना पड़ा। अब कृत्रिम पैर मिलने से वे दोबारा चलने लगे हैं और देशसेवा के लिए फिर से तैयार हैं।
बीजापुर जिले के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने स्थानीय गोंडी बोली में अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में चिंतावागु नदी में मछली पकडऩे जाते समय नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट में उन्होंने अपना दायाँ पैर खो दिया था। शिविर में कृत्रिम पैर मिलने के बाद वे फिर से चल पा रहे हैं। यह उनके जीवन का अत्यंत भावुक और यादगार क्षण है।
इसी प्रकार दंतेवाड़ा जिले के जावंगा एवं मेटापाल के जन्मजात अस्थिबाधित दिव्यांगजन अजय सोरी और कोसी पोडियाम ने ट्राइसाइकिल मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें दैनिक आवागमन में बड़ी सुविधा होगी।
इस अवसर पर बस्तर सांसद महेश कश्यप, विधायक Ÿचैतराम अटामी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती ओजस्वी मंडावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

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