गरियाबंद (मनोज वर्मा)। नगर पालिका चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत कर लिया। भाजपा प्रत्याशी रिखी राम यादव ने कांग्रेस के गेंदलाल सिंह को 164 वोटों से शिकस्त दी। यादव को कुल 3422 वोट मिले, जबकि सिंह 3258 मत ही जुटा सके।
चुनाव का दिलचस्प समीकरण
इस चुनाव में मुकाबला सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं था, बल्कि निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कई जगहों पर सियासी खेल बिगाड़ दिया। कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी ने भाजपा की राह आसान कर दी, जिससे कई वार्डों में नतीजे अप्रत्याशित रहे।
वार्ड-वार नतीजे और दिलचस्प मुकाबले
वार्ड 1- कांग्रेस के संदीप सरकार (269 वोट) ने जीत दर्ज की, जबकि भाजपा के राधे सोनवानी (133 वोट) पिछड़ गए।
वार्ड 2- निर्दलीय उम्मीदवार निरंजन प्रधान (118 वोट) ने करीबी मुकाबले में भाजपा के प्रकाश यादव (114 वोट) को हराया।
वार्ड 3- भाजपा की रेणुका साहू (220 वोट) ने कांग्रेस की विमला साहू (207 वोट) को हराया।
वार्ड 4- कांग्रेस की शीला तांडी (200 वोट) ने भाजपा की गीता (132 वोट) को शिकस्त दी।
वार्ड 5- भाजपा के विष्णु मरकाम (240 वोट) ने कांग्रेस के वरुण (211 वोट) को हराकर सीट निकाली।
वार्ड 6- कांग्रेस के छगन यादव (311 वोट) ने भाजपा के परस देवांगन (192 वोट) को मात दी।
वार्ड 7- कांग्रेस की पार्वती (248 वोट) ने भाजपा की टीमेश्वरी (217 वोट) को हराया।
वार्ड 8- भाजपा के खेम सिंह (295 वोट) ने कांग्रेस के योगेश बघेल (230 वोट) को पराजित किया।
वार्ड 9- भाजपा की मधु देवांगन (244 वोट) ने कांग्रेस की गुरनुर कौर (173 वोट) को हराया।
वार्ड 10- भाजपा के सुरेंद्र सोनटेके (327 वोट) ने कांग्रेस के सुजीत कुटारे (64 वोट) को करारी शिकस्त दी।
वार्ड 11- भाजपा के आसिफ मेमन (473 वोट) ने कांग्रेस के मुकेश रामटेक (78 वोट) को चारों खाने चित किया।
वार्ड 12- निर्दलीय पुना यादव (153 वोट) ने कांग्रेस के उत्तम सोनी (130 वोट) को हरा दिया।
वार्ड 13- भाजपा की बिंदु सिन्हा (100 वोट) ने कांग्रेस की हेमकली (95 वोट) को मामूली अंतर से हराया।
वार्ड 14- भाजपा की पुष्पा साहू (159 वोट) ने कांग्रेस की प्रतिभा (105 वोट) को पीछे छोड़ा।
वार्ड 15- भाजपा के सूरज सिन्हा (134 वोट) ने कांग्रेस के जुनैद (123 वोट) को परास्त किया।
कांग्रेस की हार के पीछे गुटबाजी और बागी उम्मीदवार!
इस चुनाव में कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती उसकी खुद की गुटबाजी साबित हुई। कई वार्डों में कांग्रेस के ही कार्यकर्ताओं ने बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन किया, जिससे पार्टी को नुकसान हुआ। वार्ड 2 और वार्ड 12 में निर्दलीय उम्मीदवारों ने कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों को हरा दिया।
भाजपा की रणनीति क्यों रही सफल?
भाजपा ने संगठनात्मक मजबूती और मतदाताओं को साधने की रणनीति अपनाई। वार्ड 10 और वार्ड 11 में भाजपा प्रत्याशियों ने एकतरफा जीत दर्ज कर कांग्रेस को चौंका दिया। वहीं, वार्ड 8 और वार्ड 9 में भी भाजपा को अपेक्षाकृत बड़ी जीत मिली।
अब आगे क्या?
नगर पालिका चुनाव के नतीजों ने यह साफ कर दिया कि भाजपा की रणनीति सफल रही, लेकिन कांग्रेस के लिए यह आत्ममंथन का समय है। निर्दलीय उम्मीदवारों की मजबूती और पार्टी के भीतर की गुटबाजी ने कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
अब देखना यह होगा कि नवनिर्वाचित नगर पालिका अध्यक्ष और पार्षद जनता से किए गए वादों को कितना निभा पाते हैं, और कांग्रेस इस हार से क्या सबक लेती है!


