छत्तीसगढ़

कटोरे से किताब तक; भीख मांग रही मासूम रिया को अफसर-नेताओं ने दिलाया शिक्षा का अधिकार

एसडीएम ने आदेश दिए- परिवार का होगा सर्वे, माता-पिता को मिलेगा रोजगार , नायब तहसीलदार और भाजपा नेताओं की पहल बनी मिसाल

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। नंगे पाँव, फटे कपड़े और हाथ में कटोरा थामे मासूम रिया सरकारी स्कूल के दरवाज़े पर भीख माँग रही थी। वही स्कूल, जहाँ उसकी उम्र के बच्चे सपनों को पंख दे रहे थे। रिया की बेबसी ने राहगीरों को तो अनदेखा कर दिया, मगर सीपत के नायब तहसीलदार देश कुमार कुर्रे और भाजपा नेता अभिलेष यादव व मन्नू सिंह ठाकुर के दिल को झकझोर दिया। पल भर में उन्होंने तय किया कि यह बच्ची कटोरे से नहीं, किताबों से अपना भविष्य सँवारेगी और यहीं से शुरू हुई एक मासूम जि़ंदगी की असली पढ़ाई..
तभी पास ही चाय दुकान पर बैठे सीपत के नायब तहसीलदार देश कुमार कुर्रे और भाजपा नेता अभिलेष यादव व मन्नू सिंह ठाकुर की नजऱ उस मासूम पर पड़ी। दिल को छू लेने वाला वह दृश्य देखकर उन्होंने तुरंत तय किया कि इस बच्ची की किस्मत अब कटोरे से नहीं, किताबों से बदलेगी।
रिया ने मासूमियत से बताया- ‘मैं छह भाई बहनों में दूसरी हूँ। कभी स्कूल नहीं गई। माँ–पापा और बड़ा भाई कबड्डी चुनते हैं, हम छोटे भाई–बहन भीख माँगते हैं, तभी घर में चूल्हा जलता है।’ यह सुनते ही मौजूद हर शख्स की आँखें भर आईं।
नायब तहसीलदार ने तुरंत उसे चप्पल दिलाई और भाजपा नेता अपनी गाड़ी में बैठाकर सीपत के नवाडीह चौक स्थित शासकीय प्राथमिक शाला ले गए। स्कूल स्टाफ ने नायब तहसीलदार के कहने पर उसका नाम दर्ज किया और उसे किताब–कॉपी, पेन व नई ड्रेस दी। पहली बार अपने लिए नई चीजें पाकर रिया की आँखों में वही चमक लौट आई, जो हर बच्चे के चेहरे पर होनी चाहिए। उसने वादा किया- ‘अब मैं भीख नहीं माँगूँगी, रोज़ स्कूल आऊँगी।’
इसके बाद रिया को तहसील कार्यालय लाया गया। गुरुवार को लिंक कोर्ट में मौजूद एसडीएम प्रवेश पैकरा ने परिवार का सर्वे कराने, राशन कार्ड बनवाने और माता-पिता को रोजगार दिलाने का आदेश पंचायत सचिव को दिया। तहसीलदार सोनू अग्रवाल ने भी भरोसा दिलाया कि मौके पर सर्वे कराकर हर संभव मदद की जाएगी। वहीं भाजपा नेता अभिलेष यादव और नायब तहसीलदार देश कुमार ने रिया को निजी ट्यूशन दिलाने और ऐसे अन्य बच्चों को ढूँढकर शिक्षा से जोडऩे का संकल्प लिया।
अभिलेष यादव ने कहा- ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि देश का कोई बच्चा अशिक्षित न रहे। अब हमारी जिम्मेदारी है कि हर गली–मोहल्ले से ऐसे बच्चों को पहचानकर उन्हें स्कूल से जोड़ा जाए।’
आज रिया ने कटोरे से किताब तक का सफर शुरू कर दिया है। सवाल यह है कि क्या हम सब मिलकर हर ‘रिया’ की जि़ंदगी बदलने का संकल्प ले पाएँगे..?

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