छत्तीसगढ़

मोपका के मार्शल मास्टर्स! डिफेंस ताइक्वांडो क्लब के खिलाडिय़ों ने जीते 4 मेडल

रेलवे स्टेशन पर हुआ जोशीला स्वागत

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। उत्तराखंड के हरिद्वार में 23 से 25 जून तक आयोजित राष्ट्रीय स्तर की ताइक्वांडो चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए बिलासपुर जिले के डिफेंस ताइक्वांडो क्लब मोपका के पांच होनहार खिलाडिय़ों ने दमदार प्रदर्शन किया। इन खिलाडिय़ों ने राष्ट्रीय पटल पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराते हुए 4 पदक जीतकर जिले और माता-पिता का मान बढ़ाया।
पदक विजेता खिलाडिय़ों में रिया भट्टाचार्य स्वर्ण पदक , ख्वाहिश पत्रे रजत पदक , प्रत्युष सिंह कांस्य पदक , पिनल सिंह कांस्य पदक हासिल किए। वहीं, आरिफ अहमद का भी प्रदर्शन सराहनीय रहा, जो पदक से चूकने के बावजूद पूरे टूर्नामेंट में जोश और अनुशासन के प्रतीक बने रहे।
विजयी खिलाडिय़ों की वापसी पर रेलवे स्टेशन में उनका भव्य स्वागत किया गया। परिजन, शुभचिंतक और क्लब के समर्थक हाथों में फूल-मालाएं और बधाई संदेश लिए बच्चों के स्वागत में उमड़ पड़े। बच्चों के चेहरों पर गर्व और खुशी की झलक साफ दिखाई दे रही थी। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर क्लब के संचालक और कोच श्री सूर्यप्रकाश चंद्राकर ने सभी खिलाडिय़ों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा, ‘ये पदक सिर्फ जीत नहीं, बल्कि बच्चों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण का प्रमाण हैं।’

कोच सूर्यप्रकाश चंद्राकर : सफलता के सूत्रधार

इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे जिस व्यक्तित्व की प्रेरणा, अनुशासन और कठोर परिश्रम का सबसे बड़ा योगदान रहा, वह हैं डिफेंस ताइक्वांडो क्लब के संचालक एवं मुख्य कोच श्री सूर्या प्रकाश चंद्राकर। उन्होंने न केवल खिलाडिय़ों को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित किया, बल्कि मानसिक दृढ़ता और आत्मविश्वास के उस स्तर तक पहुँचाया, जहाँ खिलाड़ी खुद को हर चुनौती के लिए तैयार महसूस कर सके। कोच सूर्यप्रकाश चंद्राकर ने बच्चों की इस शानदार उपलब्धि पर हर्ष जताते हुए कहा: ‘यह जीत सिर्फ पदकों की नहीं, एक संकल्प की जीत है — जो हर रोज़ खिलाडिय़ों की आंखों में मैं देखता हूँ। मेरे लिए ये बच्चे सिर्फ खिलाड़ी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के भविष्य हैं। उनकी मेहनत और लगन को सलाम करता हूँ। मुझे गर्व है कि मैं इन होनहार सितारों के सफर का हिस्सा बन पाया।’ उनके मार्गदर्शन में डिफेंस क्लब केवल एक प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि खेल और संस्कार का एक सशक्त मंच बन चुका है, जहाँ हर बच्चा अनुशासन, समर्पण और आत्मविकास के मंत्रों के साथ आगे बढ़ रहा है।

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