छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में बढ़ती सडक़ दुर्घटनाओं पर उठी आवाज; ‘आवारा पशु जू’ बनाकर हो सकता है समाधान!

गौमाता सडक़ों पर नहीं, सरकार की योजना में हों : सीपत प्रतिनिधियों की मुख्यमंत्री को पहल

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। छत्तीसगढ़ की सडक़ों पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं में एक बड़ी वजह बन चुके आवारा पशुओं को लेकर अब क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने राज्य सरकार से ठोस और दूरदर्शी पहल की मांग की है। सीपत क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधियों व नागरिकों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को संबोधित एक ज्ञापन के माध्यम से एक अनूठा लेकिन व्यवहारिक सुझाव दिया है — छत्तीसगढ़ में ‘पशु जू’ की स्थापना।
ज्ञापन में बताया गया है कि आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के चलते किसानों द्वारा बैल और गाय जैसे पालतू पशुओं को घर से निकालकर सडक़ों पर छोड़ दिया गया है, जिससे दुर्घटनाओं की दर बढ़ रही है। विगत वर्षों में सडक़ों पर मवेशियों की संख्या में लगभग 40 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है। जनप्रतिनिधियों ने प्रमुख सुझाव इस प्रकार दिया है कि जिस प्रकार वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए ‘जू’ बनाए गए हैं, उसी तर्ज पर आवारा पशुओं के लिए विशेष ‘पशु जू’ की स्थापना की जाए। , पशुचिकित्सा विभाग, वन विभाग एवं फॉरेस्ट गार्ड्स की मदद से इन पशु जू का संचालन किया जा सकता है , प्रत्येक जिले में कम से कम एक पशु जू बनाकर सडक़ों से आवारा पशुओं को हटाया जा सकता है।
बिलासपुर जिले में नरगोड़ा, पोड़ी जंगल, सोठी जंगल , अकलतरा क्षेत्र के दल्हापहाड़ जैसे स्थानों को इसके लिए उपयुक्त बताया गया है। इस ज्ञापन में जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र धीवर, जनपद कृषि स्थायी समिति के सभापति मनोज खरे, सीपत सरपंच श्रीमती मनीषा वंशकार, प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रदीप पांडेय, जांजी सरपंच श्रीमती चंद्रकली पाटले, मटियारी सरपंच सतीश केशर, उपसरपंच श्रीमती श्यामा साहू, अधिवक्ता रामाधार बुनकर सहित कई जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने हस्ताक्षर कर मुख्यमंत्री से त्वरित और ठोस कदम उठाने की अपील की है। ज्ञापनकर्ताओं का मानना है कि यह योजना ना केवल सडक़ों को दुर्घटनामुक्त बनाएगी, बल्कि पशुओं की सुरक्षा और संरक्षण में भी मील का पत्थर साबित होगी।

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