छत्तीसगढ़

मनुष्य की सबसे बड़ी ज़रूरत है आंतरिक शांति; विद्यार्थियों ने सुना डॉ. प्रेम रावत का प्रेरक संदेश

सुनील कोचिंग इंस्टीट्यूट में राज विद्या केंद्र, दिल्ली (बिलासपुर शाखा) के सौजन्य से हुआ प्रेरणादायक आयोजन

लगभग 80 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा, कोचिंग संचालक सुनील निर्मलकर ने कहा — तकनीकी युग में आंतरिक शांति बेहद जरूरी

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। सीपत क्षेत्र के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान सुनील कोचिंग इंस्टीट्यूट में रविवार को एक विशेष प्रेरक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय शांति दूत के रूप में प्रसिद्ध डॉ. प्रेम रावत के शांति एवं मानवता पर आधारित ऑडियो वीडियो संदेश का प्रसारण किया गया। यह आयोजन राज विद्या केंद्र, दिल्ली की बिलासपुर शाखा द्वारा प्रायोजित था। कार्यक्रम में कोचिंग संचालक सुनील निर्मलकर सहित लगभग 80 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। डॉ. प्रेम रावत के प्रेरक संदेश में विद्यार्थियों को जीवन में व्यर्थ मानसिक बोझ न उठाने, अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने और अपने भीतर शांति खोजने की प्रेरणा दी गई। उन्होंने कहा कि मनुष्य की चाहत और जरूरत में फर्क समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि शांति कोई विलासिता नहीं — यह जीवन की सबसे बड़ी जरूरत है। विश्व के अनेक देशों में पिछले 60 वर्षों से अधिक समय से शांति और मानवता का संदेश प्रसारित कर रहे डॉ. रावत न केवल एक मार्गदर्शक हैं, बल्कि प्रसिद्ध लेखक भी हैं। उनकी चर्चित पुस्तकें ‘स्वयं की आवाज़’ और ‘श्वास’ विश्वभर में प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।

इस अवसर पर कोचिंग संचालक श्री सुनील निर्मलकर ने कहा-
डॉ. प्रेम रावत जी का संदेश आज के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। तकनीकी और प्रतिस्पर्धा के इस दौर में जब मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा है, तब ऐसे प्रेरक विचार आत्मिक शांति और एकाग्रता का मार्ग दिखाते हैं। हमें गर्व है कि हमारे विद्यार्थियों को इस अवसर से जोडऩे का मौका मिला। कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और डॉ. रावत के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

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