छत्तीसगढ़

दतेवाड़ा एवं सुकमा जिले ने उल्लेखनीय प्रगति करते हुए कुल 11 स्वास्थ्य संस्थाओं का सफलतापूर्वक एनक्यूएएस मूल्यांकन कराया गया

दंतेवाड़ा एवं सुकमा जिले ने उल्लेखनीय प्रगति करते हुए कुल जिला मुख्यालय से 200 किलोमीटर दूर स्थित किस्टाराम उपस्वास्थ्य केंद्र भी शामिल, सीमित संसाधनों के बावजूद सेवा गुणवत्ता कायम

रायपुर, 30 नवम्बर छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के अपने संकल्प को तेजी से जमीन पर उतार रही है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (हृक्त्रस्) के तहत हाल ही में रा’य के आकांक्षी जिले दंतेवाड़ा व सुकमा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। पिछले पंद्रह दिनों में यहां कुल 11 स्वास्थ्य संस्थानों का सफलतापूर्वक मूल्यांकन पूरा हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (ङ्ख॥ह्र) के तकनीकी सहयोग से इन जिलों में सफलतापूर्वक मूल्यांकन किया गया है.
विदित हो कि सुकमा जिले के 4 और दंतेवाड़ा जिले के 7 संस्थान इस मूल्यांकन में शामिल रहे। सुकमा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बुरड़ी, उप स्वास्थ्य केंद्र कंजिपानी (छिंदगढ़), किस्टाराम व गगनपल्ली (कोंटा) तथा दंतेवाड़ा में उप स्वास्थ्य केंद्र बड़े बचेली, बड़े कमेली (दंतेवाड़ा), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फरसपाल, उप स्वास्थ्य केंद्र मडसे (गीदम), मेलावाड़ा, अरनपुर व कोड़ेनार (कुआकोंडा) ने हृक्त्रस् मूल्यांकन में भाग लिया।

दुर्गम क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण सेवाओं का विस्तार

इनमें कोंटा ब्लॉक का किस्टाराम उपस्वास्थ्य केंद्र विशेष रूप से सुर्खियों में है। जिला मुख्यालय से करीब 200 किलोमीटर और ब्लॉक मुख्यालय से लगभग 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह क्षेत्र सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। दो रा’यों की सीमाएं पार कर पहुंचने वाली इस कठिन भौगोलिक स्थितिकी चुनौतियों के बावजूद यहां कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों ने सेवा गुणवत्ता का स्तर बनाए रखा है।
नक्सल प्रभावित व दूरस्थ क्षेत्रों में उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इन 11 संस्थानों का हृक्त्रस् मूल्यांकन इस तथ्य का प्रमाण है कि संसाधन सीमित हों या सुरक्षा चुनौतियां—जनस्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता यदि अडिग हो, तो उत्कृष्टता की राह अवश्य बनती है।
सरकार का दावा है कि ऐसे प्रयासों से अब आदिवासी बहुल एवं दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों को भी पहले से अधिक सुगम, भरोसेमंद व गुणवत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।

Related Articles

Back to top button