छत्तीसगढ़

मस्तूरी में एफएलएन प्रशिक्षण का सफल समापन : बीईओ व बीआरसी की पहल से 162 शिक्षक प्रशिक्षित

नवीन पाठ्यपुस्तकों पर आधारित प्रशिक्षण से कक्षा 1 से 3 के बच्चों में भाषा और गणित की मजबूत नींव रखने पर फोकस

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं राज्य शासन के निर्देशों के अनुरूप, एससीईआरटी एवं डाइट पेंड्रा से प्राप्त दिशा-निर्देशों तथा जिला शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में मस्तूरी विकासखंड में नवीन पाठ्यपुस्तकों पर आधारित बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (एफएलएन) विषयक पाँच दिवसीय ऑफलाइन शिक्षक प्रशिक्षण के प्रथम चरण का सफल समापन हुआ। इस प्रशिक्षण का आयोजन मस्तूरी विकासखंड के समस्त प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापन की गुणवत्ता को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया। प्रथम चरण में जोन पंधी लक्ष्य 56 में 52, मस्तूरी लक्ष्य 56 में 50 तथा पचपेड़ी लक्ष्य 60 में 60, इस प्रकार कुल 162 शिक्षकों ने प्रशिक्षण में भाग लिया। पाँचवें दिवस के साथ प्रथम चरण का विधिवत समापन किया गया। प्रशिक्षण बीआरसी भवन मस्तूरी तथा जोन पंधी-पचपेड़ी में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य कक्षा 1 से 3 तक के विद्यार्थियों में भाषा एवं गणित की मजबूत आधारशिला तैयार करना है, जिससे बच्चे खेल-खेल में, गतिविधि आधारित एवं आनंददायक शिक्षण के माध्यम से सहज रूप से सीख सकें। प्रशिक्षण समापन अवसर पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) मस्तूरी शिवराम टंडन, विकासखंड स्रोत समन्वयक (बीआरसीसी) सूरज कुमार क्षत्री एवं एफएलएन प्रकोष्ठ प्रभारी प्रमोद कुमार पाण्डेय की गरिमामयी उपस्थिति में विद्या की देवी माँ सरस्वती के चरणों में दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। अतिथियों का स्वागत बीआरजी समूह द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। प्रशिक्षण के समापन अवसर पर प्रशिक्षार्थी शिक्षकों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, वहीं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को लेखनी भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रशिक्षण अवधि के दौरान शिक्षकों के लिए चाय-नाश्ता एवं जलपान की समुचित व्यवस्था भी की गई।

एफएलएन प्रशिक्षण शिक्षकों के लिए व्यवहारिक और कक्षा में सीधे लागू करने योग्य है : बीईओ टंडन

बीईओ शिवराम टंडन ने कहा कि एफएलएन आधारित यह प्रशिक्षण शिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं व्यवहारिक है। इसमें कक्षा कक्ष में सीधे लागू किए जा सकने वाले नवाचारों, गतिविधियों एवं शिक्षण विधियों पर विशेष जोर दिया गया। पाँच दिवसीय यह प्रशिक्षण पूरी तरह रोचक, सहभागितापूर्ण एवं गतिविधि आधारित रहा, जिससे शिक्षकों को नए शिक्षण कौशल विकसित करने का अवसर मिला।

नवीन पाठ्यपुस्तकों के कक्षावार लक्ष्य व दक्षताओं पर केंद्रित रहा प्रशिक्षण : बीआरसीसी क्षत्री

बीआरसीसी सूरज कुमार क्षत्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि एफएलएन आधारित नवीन पाठ्यपुस्तकों के मूल स्वरूप, कक्षावार दक्षताओं एवं कक्षावार लक्ष्यों पर गहन चर्चा की गई। प्रशिक्षण के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि किस प्रकार अध्याय आधारित गतिविधियों, खेल, समूह कार्य, कहानी एवं चित्रों के माध्यम से बच्चों की सीखने की क्षमता को सशक्त बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षण में बीआरजी प्रशिक्षक के रूप में सावित्री सेन, धीरेंद्र सत्यवेदी, जितेंद्र वैष्णव, अमरदीप भोगल, शंकर लाल कैवर्त, लखेश्वर सिंह नेताम, कल्पना सिंह एवं हीरेंद्र मरावी जैसे अनुभवी शिक्षकों द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया गया। प्रशिक्षकों ने इस वर्ष लागू हिंदी, गणित एवं अंग्रेजी की नवीन पाठ्यपुस्तकों की विशेषताओं तथा अध्याय आधारित गतिविधियों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण सत्रों में यह भी बताया गया कि बच्चों में पढऩे-लिखने की प्रारंभिक क्षमता, संख्या पहचान, जोड़-घटाव जैसी बुनियादी अवधारणाओं को किस प्रकार रोचक गतिविधियों के माध्यम से विकसित किया जा सकता है। योजना के अनुसार कुल पाँच दिवसीय प्रशिक्षण चार चरणों में आयोजित किया जा रहा है। प्रथम चरण में कक्षा 1 से 3 में अध्यापन कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि कक्षा 4 एवं 5 के शिक्षकों का प्रशिक्षण तृतीय एवं चतुर्थ चरण में आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण अवधि के दौरान राज्य रिसोर्स पर्सन विकास वर्मा, डाइट पेंड्रा प्रभारी अल्का शुक्ला, जिला रिसोर्स पर्सन प्रियंका केशरवानी सहित विकासखंड एवं जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण स्थल का भ्रमण कर गुणवत्ता संबंधी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। प्रथम चरण के प्रशिक्षण में प्रतिभागी शिक्षकों में विशेष उत्साह देखने को मिला। शिक्षकों ने इसे अपने अध्यापन कौशल को निखारने का एक सार्थक अवसर बताया। यह प्रशिक्षण निश्चित रूप से आने वाले समय में बच्चों की बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बीआरसी कार्यालय मस्तूरी से कमलेश खोबरागढ़े, हिमांशु शर्मा, विनीता सिंह, चंद्र कुमार चंद्राकर, गोपी नायक, जैनेंद्र गुप्ता एवं दीपक शर्मा का सराहनीय योगदान रहा।

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