सुनील शिक्षण संस्थान का ऐतिहासिक शैक्षणिक भ्रमण; गंगरेल से चंपारण तक आस्था, ज्ञान और संस्कृति की अनुपम यात्रा
पुस्तकों का ज्ञान तभी सार्थक होता है, जब विद्यार्थी उसे जीवन और समाज से जोड़ें : सुनील निर्मलकर

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। सुनील शिक्षण संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा 20 दिसंबर को एक शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक भ्रमण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस एकदिवसीय भ्रमण के अंतर्गत विद्यार्थियों ने गंगरेल डेम, राजिम, चंपारण, बड़े तरिया कुम्हारी तथा बंजारी माता मंदिर रायपुर का दर्शन एवं अवलोकन किया। इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों के ज्ञान से आगे बढक़र प्रकृति, इतिहास, संस्कृति और धार्मिक मूल्यों से जोडऩा था। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने देवी-देवताओं के दर्शन कर सद्बुद्धि, सफलता एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
गंगरेल डेम : प्रकृति और इंजीनियरिंग का अद्भुत संगम
भ्रमण की शुरुआत छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गंगरेल डेम से हुई। यहाँ विद्यार्थियों ने जल संसाधन प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं। प्राकृतिक सौंदर्य ने विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
राजिम और चंपारण- धार्मिक व ऐतिहासिक चेतना का केंद्र
इसके पश्चात दल ने राजिम पहुँचकर त्रिवेणी संगम के दर्शन किए, जहाँ महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों का संगम होता है। वहीं चंपारण में भगवान श्रीराम से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं की जानकारी मिली, जिससे विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति और इतिहास के प्रति गहरी रुचि जागृत हुई।
बड़े तरिया कुम्हारी एवं बंजारी माता मंदिर : आस्था और श्रद्धा का केंद्र
भ्रमण के अंतिम चरण में विद्यार्थियों ने बड़े तरिया कुम्हारी एवं बंजारी माता मंदिर, रायपुर में दर्शन कर आशीर्वाद लिया। विद्यार्थियों ने माँ से सद्बुद्धि, अनुशासन और सफलता की प्रार्थना की। इस दौरान वातावरण पूर्णत: भक्तिमय बना रहा।
संस्थान के संचालक सुनील निर्मलकर ने बताया कि शिक्षा केवल कक्षा और किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, सोच और संस्कारों का सर्वांगीण विकास करते हैं। जब विद्यार्थी प्रकृति, संस्कृति और आस्था से जुड़ते हैं, तभी उनमें सच्ची समझ और सद्बुद्धि का विकास होता है। उन्होंने आगे कहा कि सुनील शिक्षण संस्थान भविष्य में भी ऐसे ज्ञानवर्धक और संस्कारात्मक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा।
विद्यार्थियों में दिखा उत्साह
इस भ्रमण से विद्यार्थियों में अत्यधिक उत्साह देखने को मिला। विद्यार्थियों ने इसे यादगार, ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक अनुभव बताया। शिक्षकों के मार्गदर्शन में अनुशासन एवं सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया। सुनील शिक्षण संस्थान का यह शैक्षणिक भ्रमण न केवल अध्ययन की दृष्टि से उपयोगी रहा, बल्कि विद्यार्थियों के नैतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विकास में भी महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ। यह कार्यक्रम संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संस्कारयुक्त सोच का सशक्त उदाहरण बना।


