छत्तीसगढ़

स्व-सहायता समूह से जुडक़र बदली जिंदगी की तस्वीर

स्वरोजगार अपनाकर ‘लखपति दीदी’ बनीं सम्पत्ति प्रजापति

  • मासिक आय 10 हजार रुपये से बढक़र हुई 25 हजार रुपये तक

रायपुर, 23 अप्रैल। मुंगेली जिले के जनपद पंचायत लोरमी के ग्राम खपरीकला की निवासी श्रीमती सम्पत्ति प्रजापति ने सीमित संसाधनों के बावजूद स्व-सहायता समूह से जुडक़र आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली सम्पत्ति दीदी आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जा रही हैं और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। समूह से जुडऩे से पहले उनके परिवार की आय का मुख्य साधन एक छोटा सा होटल व्यवसाय था, जिससे मुश्किल से घर का खर्च चल पाता था। परिवार की आवश्यकताएं पूरी करना भी चुनौतीपूर्ण था। लेकिन एनआरएलएम (बिहान) योजना के अंतर्गत ‘जय शनिदेव महिला स्व-सहायता समूह’ से जुडऩे के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया।
समूह के माध्यम से उन्हें रिवॉल्विंग फंड, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड एवं बैंक लिंकेज के तहत ऋण सुविधाएं प्राप्त हुईं। इन संसाधनों का सदुपयोग करते हुए उन्होंने अपने होटल व्यवसाय का विस्तार किया और साथ ही सुहाग भंडार एवं किओस्क बैंकिंग का कार्य भी शुरू किया। उनकी मेहनत और लगन का परिणाम यह रहा कि उनकी मासिक आय, जो पहले मात्र 10 हजार रुपये थी, बढक़र अब लगभग 25 हजार रुपये तक पहुंच गई है, जबकि वार्षिक आय करीब 03 लाख रुपये हो गई है। इसके साथ ही कृषि कार्य से भी उन्हें सालाना लगभग 01 लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
आर्थिक सशक्तिकरण के इस सफर ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। परिवार का जीवन स्तर बेहतर हुआ है, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है और वे आज आत्मनिर्भर बनकर सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। सम्पत्ति दीदी अब अपने व्यवसाय को और विस्तार देने के साथ-साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुडक़र आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी यह सफलता की कहानी यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, योजनाओं का लाभ और दृढ़ संकल्प से कोई भी महिला अपने जीवन को बदल सकती है।

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