छत्तीसगढ़

सुशासन तिहार से मछुआरों के जीवन में आई समृद्धि की नई लहर

मत्स्य पालन प्रसार योजना से आत्मनिर्भर बने ग्रामीण मछुआरे

  • अब मेहनत की पूरी कमाई पहुंचेगी मछुआरों के घर

रायपुर , 31 मई। प्रदेश में सुशासन तिहार आमजन की समस्याओं के समाधान के साथ-साथ ग्रामीणों के जीवन में आर्थिक बदलाव और आत्मनिर्भरता का माध्यम बनता जा रहा है। बलरामपुर जिले के ग्राम बाहरचूरा के मछुआरों की सफलता इसकी प्रेरक मिसाल है। शासन की मत्स्य पालन प्रसार योजना के तहत मिली सहायता से अब ग्रामीण मछुआरे अपनी मेहनत का पूरा लाभ स्वयं प्राप्त कर सकेंगे।
जिले के विजयनगर में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्राम बाहरचूरा निवासी श्री संजय सिंह सहित 6 हितग्राहियों को उन्नत मत्स्य जाल एवं आईसबॉक्स प्रदान किए गए। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने हितग्राहियों को सामग्री वितरित कर उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढऩे के लिए शुभकामनाएं दीं।
ग्राम बाहरचूरा की गंगा मछुआ सहकारी समिति से जुड़े 11 परिवार वर्षों से मत्स्य पालन के माध्यम से आजीविका चला रहे हैं। समिति के पास लगभग 29 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले दो बड़े जलाशय हैं, जहां मत्स्य उत्पादन किया जाता है। हालांकि आवश्यक उपकरणों की कमी के कारण उन्हें मछली निकालने के लिए बाहरी लोगों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे आय का बड़ा हिस्सा कमीशन के रूप में देना पड़ता था।
श्री संजय सिंह ने बताया कि पहले समिति के पास स्वयं के जाल नहीं होने के कारण कुल आय का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा बाहरी लोगों को देना पड़ता था। इससे मेहनत के अनुरूप आमदनी नहीं हो पाती थी। अब शासन से जाल मिलने के बाद समिति के सदस्य स्वयं मत्स्याखेट कर सकेंगे और अतिरिक्त आय सीधे उनके परिवारों तक पहुंचेगी।
उन्होंने बताया कि आईसबॉक्स मिलने से मछलियों को सुरक्षित रखकर दूरस्थ बाजारों तक ले जाना आसान होगा। पहले मछलियों के खराब होने की आशंका बनी रहती थी, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। अब मछलियों की गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी और बाजार में उचित मूल्य भी प्राप्त होगा।

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