छत्तीसगढ़ में खरीफ फसलों का डिजिटल ‘एक्स-रे’
गड़बड़ी पर नपेंगे अफसर, शत-प्रतिशत व पारदर्शी गिरदावरी के कड़े निर्देश

- राजस्व विभाग का फरमान, लापरवाही पर होगी सीधी अनुशासनात्मक कार्रवाई
रायपुर, 06 अगस्त। छत्तीसगढ़ राज्य में समर्थन मूल्य पर धान, मक्का और प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत उड़द, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली व अरहर की खरीदी की तैयारियों के बीच छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने एक बड़ा और कड़ा रुख अपनाया है। विभाग द्वारा प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को खरीफ फसल की शत-प्रतिशत और त्रुटिरहित गिरदावरी (डिजिटल व मैन्युअल) सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। शासन ने साफ कर दिया है कि गिरदावरी कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या हेरफेर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ में गिरदावरी प्रक्रिया की शुद्धता, पारदर्शिता और मैदानी फर्जीवाड़े पर प्रभावी लगाम लगाने के लिए शासन ने उच्च अधिकारियों से लेकर मैदानी अमले तक 7-स्तरीय भौतिक सत्यापन की सख्त व्यवस्था लागू की है।
इस नई व्यवस्था के तहत पटवारी अपने हल्के के शत-प्रतिशत (100′) रकबे का सत्यापन करेंगे। इसके साथ ही राजस्व निरीक्षक और कृषि विस्तार अधिकारी 25-25 प्रतिशत रकबे की जांच करेंगे, जबकि तहसीलदार व नायब तहसीलदार को 10 प्रतिशत और अनुविभागीय अधिकारी (स्ष्ठह्र) को 5 प्रतिशत रकबे के सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक कसावट को और मजबूत करते हुए जिला स्तरीय अधिकारी 1प्रतिशत तथा राज्य व संभाग स्तरीय अधिकारी 0.1 प्रतिशत गिरदावरी का औचक (रैंडम) निरीक्षण करेंगे।
प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए शासन ने स्पष्ट समय-सीमा तय कर दी है। इसके तहत 20 सितंबर 2026 तक गिरदावरी का कार्य पूर्ण कर खसरा एवं भुईयां सॉफ्टवेयर में प्रविष्टि व त्रुटि सुधार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद 25 सितंबर 2026 को ग्रामवार फसल क्षेत्राच्छादन प्रतिवेदन का प्रारंभिक प्रकाशन होगा, जिसके आधार पर प्राप्त होने वाली दावा-आपत्तियों का निराकरण करते हुए 30 सितंबर 2026 तक खसरा पांचसाला और भुईयां सॉफ्टवेयर में अंतिम संशोधन कर दिया जाएगा।
सरकारी रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाने के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि यदि किसी किसान ने धान की जगह अन्य फसल बोई है या जमीन खाली छोड़ी है, तो पटवारी और राजस्व निरीक्षक को मोबाइल से उस खेत का खसरावार फोटो अपलोड करना होगा। राजस्व रिकॉर्ड और वास्तविक बोए गए रकबे में अंतर पाए जाने पर संबंधित मैदानी अमले और पर्यवेक्षण अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।
गिरदावरी की तिथियों से ग्रामीणों को अवगत कराने के लिए गांवों में कोटवारों के जरिए मुनादी कराई जाएगी। गिरदावरी के दौरान स्थानीय जन-प्रतिनिधियों को भी जांच के समय उपस्थित रहने का अवसर दिया जाएगा साथ ही किसान स्वयं उपस्थित होकर अपना फोटो खिंचवा सकते है। इसके अलावा, संभागीय आयुक्त और भू-अभिलेख संचालक हर 15 दिन में गिरदावरी की प्रगति की पाक्षिक समीक्षा करेंगे।

