माटी का लाल, समृद्धि की मिसाल
समन्वित खेती अपनाकर नारायणपुर के तिजाराम ने गढ़ी सफलता की नई इबारत

- ‘परंपरागत खेती छोड़ अपनाई बहुआयामी तकनीक, अब सालाना कमा रहे हैं, 2 लाख रुपये से अधिक
रायपुर,17 अगस्त। छत्तीसगढ़ के वनांचल जिले नारायणपुर के ग्राम बड़ेझमरी में एक किसान के अटूट संकल्प और आधुनिक सोच ने विकास की नई बयार ला दी है। वर्षों से पारंपरिक खेती कर रहे किसान तिजाराम पिता सुखराम ने कृषि के पारंपरिक ढर्रे को बदलकर ‘समन्वित खेती’ को अपनाया और आज वे क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के लिए प्रेरणापुंज बन गए हैं।
तिजाराम बीते दो दशकों से कृषि कार्य में लगे हैं। उनके पास लगभग 2 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जिस पर वे धान, मक्का, उड़द, चना और अरहर जैसी पारंपरिक फसलें लेते रहे हैं। लेकिन सिर्फ एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने उद्यानिकी फसलों, पशुपालन, मुर्गीपालन, बत्तख पालन और मछलीपालन को अपनी खेती का हिस्सा बनाया। इस बहुआयामी दृष्टिकोण से उन्हें अब साल के बारह महीने नियमित आय प्राप्त होती है।
तिजाराम की सफलता की वास्तविक यात्रा लगभग तीन वर्ष पूर्व शुरू हुई, जब वे कृषि विभाग के अधिकारियों और ‘आत्मा’ योजना के मैदानी अमले के संपर्क में आए। विभागीय प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उन्होंने आधुनिक तकनीकों को अपनी ज़मीन पर उतारा। विभाग द्वारा उन्हें अरहर उत्पादन के लिए उन्नत किस्म के नि:शुल्क बीज और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया। उन्होंने अरहर की खेती के साथ-साथ मुर्गीपालन, बत्तख पालन और तालाब में मछलीपालन को एक-दूसरे से जोडक़र एकीकृत रूप दिया।
अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए तिजाराम बताते हैं कि जब खेती के साथ पशुपालन, मुर्गी-बत्तख और मछलीपालन जैसी गतिविधियों को एक-दूसरे से जोड़ा, तो खेत का हर कोना आमदनी देने लगा। समन्वित खेती की बदौलत आज मेरी वार्षिक आय 2 लाख रुपये से अधिक हो गई है। अब परिवार का पालन-पोषण न केवल बेहतर ढंग से हो रहा है, बल्कि खेती के विस्तार का हौसला भी बढ़ा है।
तिजाराम की यह सफलता केवल उनके घर तक सीमित नहीं है। उनकी इस उपलब्धि और बढ़ती आय को देखकर ग्राम बड़ेझमरी और आसपास के गांवों के अन्य किसान भी काफी प्रभावित हैं। क्षेत्र के किसान अब उनसे सीख लेकर समन्वित खेती और सहायक कृषि गतिविधियों को अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।



