राजधानी

छत्तीसगढ़ के विकास का प्रमुख इंजन बनेगा हाउसिंग बोर्ड, आवास के साथ अधोसंरचना विकास में निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका: चौधरी

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में मंडल को आर्थिक रूप से सुदृढ़ और बहुआयामी अधोसंरचना विकास संस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

रायपुर, 27 अक्टूबर। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा है कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल आने वाले वर्षों में प्रदेश के आर्थिक और अधोसंरचनात्मक विकास का प्रमुख इंजन बनेगा। हाउसिंग बोर्ड को केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि सडक़, पुल, खेल अधोसंरचना, सार्वजनिक भवनों, टाउन प्लानिंग और शहरी पुनर्विकास जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में भी इसकी भागीदारी बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए मंडल को परंपरागत कार्यप्रणाली से आगे बढक़र नवाचार, आधुनिक तकनीक, वित्तीय प्रबंधन और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति अपनानी होगी।
आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री चौधरी आज नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला का उद्देश्य मंडल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता, प्रशासनिक क्षमता, वित्तीय प्रबंधन और कार्यकुशलता में वृद्धि करना तथा उन्हें आधुनिक निर्माण तकनीकों, नवाचारी वित्तीय मॉडल और अधोसंरचना विकास की नई संभावनाओं से परिचित कराना था।
मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को आर्थिक रूप से सुदृढ़, आत्मनिर्भर और बहुआयामी अधोसंरचना विकास संस्था के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से मंडल की वित्तीय स्थिति में सुधार, रिक्त संपत्तियों के विक्रय, नई परियोजनाओं के चयन और कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं।
आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि कुछ वर्ष पूर्व हाउसिंग बोर्ड गंभीर वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा था। बड़ी ऋण देनदारी, सीमित परियोजनाओं और लंबे समय से रिक्त पड़ी संपत्तियों के कारण संस्था की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई थी। उन्होंने कहा कि हाउसिंग बोर्ड बजट आधारित संस्था नहीं है। उसे अपनी परियोजनाओं, सेवाओं और संसाधनों के माध्यम से आय अर्जित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना होगा।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने वित्त विभाग के सहयोग से लगभग 700 करोड़ रुपये की लंबित ऋण देनदारी समाप्त करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इससे मंडल को बड़े वित्तीय दबाव से राहत मिली और नई परियोजनाओं की दिशा में आगे बढऩे का अवसर प्राप्त हुआ। श्री चौधरी ने कहा कि लंबे समय से रिक्त पड़ी संपत्तियों के विक्रय के लिए वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना लागू की गई। आकर्षक छूट, प्रभावी विपणन और निरंतर निगरानी के माध्यम से बड़ी संख्या में संपत्तियों का विक्रय संभव हुआ। इससे मंडल की वित्तीय स्थिति में सुधार के साथ उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा मिला। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए मंडल अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव सहित अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की।
मंत्री श्री चौधरी ने सेरीखेड़ी क्षेत्र की टाउन प्लानिंग परियोजना का उदाहरण देते हुए बताया कि लगभग 800 करोड़ रुपये की अधोसंरचना विकास लागत वाली परियोजना को पीपीपी मॉडल के माध्यम से आगे बढ़ाने की पहल की गई है।
उन्होंने बताया कि परियोजना में विकास लागत के समायोजन के लिए प्रारंभिक गणना के अनुसार लगभग 218 एकड़ भूमि की आवश्यकता थी। प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के बाद यह आवश्यकता लगभग 124 एकड़ तक सीमित हो गई। इस प्रकार लगभग 94 एकड़ भूमि की बचत संभव हुई, जिसका उपयोग अन्य सार्वजनिक आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मॉडल से सरकारी बजट पर प्रत्यक्ष वित्तीय दबाव कम करने के साथ नागरिकों को बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध कराई जा सकती है।
मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि किसी भी राज्य के आर्थिक विकास में पूंजीगत व्यय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सडक़, पुल, औद्योगिक क्षेत्र, आवासीय परिसर और सार्वजनिक सुविधाओं में निवेश से रोजगार, व्यापार, परिवहन और अन्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और चीन जैसे देशों के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि दीर्घकालिक सोच, आधुनिक अधोसंरचना और निवेश आधारित विकास रणनीतियों से बड़े परिवर्तन संभव हैं। छत्तीसगढ़ में भी विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। इनका लाभ उठाने के लिए सरकारी संसाधनों के साथ निजी निवेश और वैकल्पिक वित्तीय मॉडल को बढ़ावा देना होगा।
मंत्री श्री चौधरी ने अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि वे अपनी भूमिका को केवल नियमित कार्यालयीन कार्यों तक सीमित न रखें। प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को अपनी तकनीकी विशेषज्ञता, अनुभव और कार्यक्षमता के माध्यम से प्रदेश के विकास में अधिकतम योगदान देने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हाउसिंग बोर्ड को परियोजनाओं की संख्या बढ़ाने के साथ उनकी गुणवत्ता, आर्थिक व्यवहार्यता, समयबद्ध क्रियान्वयन और जनोपयोगिता पर विशेष ध्यान देना होगा। नई तकनीक, बेहतर प्रबंधन, व्यावसायिक दृष्टिकोण और टीमवर्क के माध्यम से मंडल को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है।
श्री चौधरी ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के विजन को साकार करने में हाउसिंग बोर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके लिए मंडल को टाउन प्लानिंग, शहरी पुनर्विकास, खेल अधोसंरचना और सार्वजनिक-निजी भागीदारी आधारित परियोजनाओं में ठोस परिणाम प्रस्तुत करने होंगे।
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड का अधोसंरचना विकास मंडल के रूप में विस्तार केवल नाम या अधिनियम में परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह संस्था की सोच, कार्यशैली और जिम्मेदारियों में व्यापक बदलाव का अवसर है। उन्होंने कहा कि वास्तविक परिवर्तन तभी संभव होगा, जब प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी नवाचार, तकनीकी दक्षता और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ कार्य करेगा। इसी उद्देश्य से आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में आईआईएम रायपुर सहित प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा प्रबंधन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, तकनीकी अधोसंरचना और वित्तीय प्रबंधन जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया जा रहा है। उन्होंने विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण मंडल की भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
मंडल अध्यक्ष श्री सिंह देव ने कहा कि पिछले लगभग 18 महीनों में मंडल ने संपत्ति विक्रय, राजस्व अर्जन और नई परियोजनाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने लगभग 8 हजार संपत्तियों के विक्रय और 1,800 करोड़ रुपये के राजस्व अर्जन का उल्लेख करते हुए कहा कि ओटीएस योजना तथा प्रभावी विपणन प्रयासों से लंबे समय से रिक्त संपत्तियों के विक्रय को गति मिली है। उन्होंने बताया कि लगभग 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक की नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया है तथा आगामी दिसंबर में भी नई परियोजनाएं प्रारंभ करने की तैयारी है। उन्होंने अधिकारियों से बकाया राशि की वसूली, संपत्तियों के विक्रय और परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने को कहा। साथ ही मंडल को पीपीपी मॉडल, पुनर्विकास और अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं में अपनी भागीदारी बढ़ाने तथा अन्य राज्यों की निविदाओं में प्रतिस्पर्धा करने योग्य बनाने पर जोर दिया।
अनुराग सिंह देव ने कहा कि मंडल का उद्देश्य केवल मकानों का निर्माण और विक्रय करना नहीं, बल्कि प्रदेश के सभी 33 जिलों में नागरिकों को बेहतर सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित और आधुनिक टाउनशिप उपलब्ध कराना है। आवासीय कॉलोनियों में उद्यान, बाजार, सामुदायिक सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण और ईवी चार्जिंग स्टेशन जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व एवं राष्ट्रीय भावना को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि अधोसंरचना विकास में मंडल की भूमिका लगातार बढ़ेगी। इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए अपनी कार्यक्षमता बढ़ानी होगी। उन्होंने कहा कि बदलाव के लिए कल की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए, बल्कि आज से ही नई सोच और नई कार्यसंस्कृति के साथ कार्य प्रारंभ करना होगा।
कार्यशाला में आईआईएम रायपुर के निदेशक डॉ. संजीव पाराशर ने भी अपना अनुभव साझा किया। साथ ही आईआईआईटी नवा रायपुर के प्रोफेसर डॉ. श्रीनिवास के.जी., एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर डॉ. जी.डी. रामटेके सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों तथा मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के तकनीकी सत्र निर्धारित किए गए है। इस अवसर पर आवास एवं पर्यावरण सचिव श्री अंकित आनंद, मंडल आयुक्त श्री अवनीश शरण, अपर आयुक्त श्री हर्ष कुमार जोशी, श्री अजीत कुमार पटेल, श्री एम डी पनारिया, श्री सुनील भगत सहित मंडल के वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता, तकनीकी विशेषज्ञ तथा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री चौधरी ने प्रशिक्षण कार्यशाला के आयोजन और संस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

Related Articles

Back to top button