विजयादशमी पर खम्हरिया में संघ का विराट पथ संचलन; राष्ट्रभाव और अनुशासन की मिसाल
संघ के शताब्दी वर्ष पर घोष दल की गूंज से खम्हरिया हुआ अभिभूत, मुख्य वक्ता गणपति रॉयल बोले - शक्तिशाली ही करता है विजय प्राप्त

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के गौरवशाली अवसर पर खम्हरिया मंडल में प्रथम बार घोष दल के साथ भव्य पथ संचलन आयोजित किया गया। यह ऐतिहासिक संचलन गायत्री मंदिर खम्हरिया से प्रारंभ होकर बस स्टैंड, आवास पारा, बस्ती होते हुए बाजार पारा हाई स्कूल तक निकाला गया। घोष की गूंज और स्वयंसेवकों की अनुशासित पंक्तियों ने पूरे नगर को संघमय बना दिया।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता प्रांत मिलन मंडली प्रमुख गणपति रॉयल ने कहा कि शक्तिशाली ही विजय प्राप्त करता है, दो बलवान कभी नहीं लड़ते , जैसे शेर की शक्ति से ही जंगल में शांति बनी रहती है। इसी प्रकार समाज में शांति के लिए संगठन और शक्ति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विजयादशमी के दिन श्रीराम ने रावण का वध किया, और इसी दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने संघ की स्थापना कर राष्ट्रनिर्माण की ज्योति जलाई। हम 800 वर्ष मुगलों और 200 वर्ष अंग्रेजों की गुलामी में रहे। उस समय हिंदू समाज की स्थिति दयनीय थी, लेकिन डॉ. हेडगेवार ने संगठन शक्ति के बल पर नया युग आरंभ किया। आज संघ 80 देशों में कार्यरत है। उन्होंने कहा कि संघ को समझना है तो हेडगेवार जी को पढऩा होगा।
एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि हेडगेवार जी जिस विद्यालय में पढ़ते थे, वहां अंग्रेज अधिकारी के आने पर ‘वंदे मातरम्’ के उच्चारण पर सभी छात्रों को निकाल दिया गया। जब माफी मांगने को कहा गया, तो हेडगेवार जी ने इंकार कर दिया और वहीं से उनकी क्रांतिकारी यात्रा प्रारंभ हुई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि शिव अग्रवाल, मंडल कार्यवाह विजय सिंह ठाकुर, उनी बिटकुला मंडल कार्यपालक पवन सिंह ठाकुर, मस्तूरी खंड प्रमुख देवेंद्र सिंह क्षत्रिय, खंड सह कार्यवाह नीरज सिंह क्षत्रिय, उप खंड कार्यवाह राजेश केंवट, एवं मुख्य शिक्षक सुखनंदन सिंह ठाकुर उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन देवेश शर्मा द्वारा किया गया।
100 स्वयंसेवकों की अनुशासित सहभागिता
खम्हरिया मंडल के साथ-साथ आसपास के ग्रामों से लगभग 100 स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में पथ संचलन में भाग लिया। घोष की ताल और स्वयंसेवकों की अनुशासनपूर्ण चाल से सम्पूर्ण वातावरण राष्ट्रभक्ति और संगठन भावना से ओतप्रोत हो गया।
समापन
संघ के शताब्दी वर्ष के इस विशेष अवसर पर आयोजित पथ संचलन ने खम्हरिया मंडल में नई ऊर्जा और एकता का संदेश दिया। यह आयोजन संघ की संगठनात्मक शक्ति, संस्कार और राष्ट्रनिष्ठा का प्रतीक बन गया।



