किसानों के ‘पीले सोने’ पर संकट के बादल — धान खरीदी से पहले आंदोलन की आग तेज़!
सहकारी समिति कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटरों का अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी

चार सूत्रीय मांगों पर सरकार से टकराव — चार दिन बाद खरीदी शुरू, पर तैयारियां ठप
सीपत (हिमांशु गुप्ता)। छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी महोत्सव शुरू होने जा रहा है, लेकिन इस बार किसानों के ‘पीले सोने’ पर संकट के गहरे बादल छा गए हैं। खरीदी केंद्रों में हलचल की जगह अब सन्नाटा पसरा हुआ है। वजह है सहकारी समिति कर्मचारियों और समर्थन मूल्य धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटरों का अनिश्चितकालीन आंदोलन, जो अब आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है। राज्यभर के दो हजार से अधिक धान खरीदी केंद्रों में तैयारियां पूरी तरह ठप हैं। फड़ की सफाई नहीं हो पाई है, किसानों का पंजीयन अधर में लटका है और खरीदी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। आंदोलनकारियों ने साफ कहा है — ‘जब तक मांगे नहीं मानी जाएंगी, काम पर वापसी नहीं होगी।’
चार सूत्रीय मांगें जिन पर अटका है पहिया
1. नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाए – 18 वर्षों से संविदा पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को स्थाई पद का दर्जा दिया जाए।
2. वेतन विसंगतियों का निराकरण – ऑपरेटरों को सालभर का वेतन और समान वेतनमान लागू किया जाए।
3. प्रबंधकीय अनुदान की मांग – मध्यप्रदेश की तर्ज पर राज्य की 2058 समितियों को 3-3 लाख रु. का अनुदान मिले ताकि वेतन भुगतान में देरी न हो।
4. सेवा शर्तों का स्थायी निर्धारण – सेवा नियम 2018 में संशोधन कर समिति कर्मचारियों के हित में पुनरीक्षित वेतनमान लागू किया जाए।
आंदोलनकारियों का कहना है कि हम किसानों के पसीने की कमाई को तौलने वाले हैं, लेकिन हमारी अपनी गिनती आज भी ठेकेदारों जैसी है,।आंदोलनकारी संघ के प्रतिनिधियों ने कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ‘सहकार से समृद्धि’ की बात तो करती है, पर सहकारी समितियों में कार्यरत कर्मचारियों की सुध कोई नहीं ले रहा।
बिलासपुर संभाग में गूंजा आंदोलन
मुंगेली, कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, शक्ति, सारंगढ़ और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही सहित सभी जिलों के समिति कर्मचारी और ऑपरेटर बिलासपुर में डटे हुए हैं। आंदोलन की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सोमवार को भी सभी केंद्रों में ताले लटके रहे और अब ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ का आयोजन करने की तैयारी है, जिसमें लगभग 2700 कर्मचारी शामिल होंगे।
किसानों की चिंता बढ़ी , सरकार के सामने चुनौती
धान खरीदी की तारीख नजदीक आने के बावजूद तैयारियों का अभाव किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रहा है। कई केंद्रों पर पंजीयन बंद है, जिससे किसान भटक रहे हैं। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो धान खरीदी की तारीख आगे बढ़ सकती है, और इसका सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ेगा। एक ओर सरकार धान बोनस और समर्थन मूल्य की योजनाओं के प्रचार में व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी स्तर पर खरीदी केंद्रों की गाडिय़ां जाम पड़ी हैं। अब पूरा प्रदेश देख रहा है कि सरकार इस टकराव को सुलझाती है या धान खरीदी की प्रक्रिया संकट में पड़ती है।
धान खरीदी के लिए सिर्फ चार दिन शेष , लेकिन समाधान अब तक नहीं
धान खरीदी के लिए अब सिर्फ चार दिन शेष हैं — अगर समाधान नहीं निकला, तो इस बार किसानों का पीला सोना मंडी तक पहुंचने से पहले ही धरने की धूल में सिमट सकता है।



