बसंत पंचमी पर पोड़ी संकुल में रंगारंग वार्षिकत्व का आयोजन , बच्चों ने बिखेरी छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति की छटा
शिक्षा, संस्कृति और संस्कार का संगम बना पोड़ी का पहला वार्षिकोत्सव

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर शुक्रवार को संकुल केंद्र पोड़ी के अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला, पूर्व माध्यमिक एवं हाईस्कूल पोड़ी के संयुक्त तत्वाधान में पोड़ी में पहली बार भव्य एवं रंगारंग वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन ने पूरे ग्राम को उत्सवमय वातावरण से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पोड़ी सरपंच सूर्यप्रकाश शेष उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र धीवर, जनपद सदस्य श्रीमती अनिता विजय गुप्ता, विधायक प्रतिनिधि किशन धुलिया, प्राचार्या श्रीमती माला पाल, संकुल शैक्षिक समन्वयक रामबाबू कर्ष, श्रीमती अर्चना केशर, प्रधानपाठक क्षेमकरण श्रीवास, पूर्व सरपंच रामकुमार कुम्भकार सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, एसएमसी अध्यक्ष, पंचगण एवं ग्रामवासी मौजूद रहे। शाला परिवार द्वारा सभी अतिथियों का साल एवं श्रीफल भेंट कर आत्मीय सम्मान किया गया।

बच्चों की प्रतिभा पर पोड़ी को गर्व, गांव के लिए गौरव का क्षण : सरपंच सूर्यप्रकाश शेष
मुख्य अतिथि पोड़ी सरपंच सूर्यप्रकाश शेष ने कहा कि पोड़ी के लिए यह गर्व का विषय है कि हमारे संकुल के विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं। बच्चों में छिपी प्रतिभा को मंच देकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाना ही सच्ची शिक्षा है। यह पहला वार्षिकोत्सव नहीं, बल्कि आने वाले उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है। ऐसे आयोजन गांव की पहचान को नई ऊंचाई देते हैं।
शिक्षा को किताबों से निकालकर मंच तक लाना ही हमारा लक्ष्य : रामबाबू कर्ष
संकुल शैक्षिक समन्वयक रामबाबू कर्ष ने कहा कि पोड़ी संकुल का यह वार्षिकोत्सव हमारे लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण है। हमारा उद्देश्य बच्चों को किताबों तक सीमित न रखकर उनके भीतर छिपी कला, संस्कृति और नेतृत्व क्षमता को मंच देना है। आज हमारे बच्चों ने यह सिद्ध कर दिया कि ग्रामीण क्षेत्र का विद्यार्थी भी किसी से कम नहीं है। शिक्षक, पालक और समाज तीनों मिलकर यदि आगे बढ़ें, तो संकुल पोड़ी शिक्षा के क्षेत्र में नई मिसाल कायम करेगा। कार्यक्रम के दौरान छात्र छात्राओं ने छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य, गीत, नाटक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से स्थानीय संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की। बच्चों की प्रतिभा देखकर अतिथि एवं उपस्थित जनसमूह मंत्रमुग्ध हो गए। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा पुरस्कार प्रदान कर उत्साहवर्धन किया गया।आयोजन को सफल बनाने में शिक्षकों में श्री जेएस. राज, देवेंद्र कौशिक, आशुतोष तिवारी, ऐश्वर्या कुमार बैगा, श्रीमती नीलिमा सैनिक, अनुराधा कौशिक, सुनीता साहू, गायत्री कौशिक, पूजा सिंह, अरुणा राठौर, मनीष यादव, राजू यादव, अंशकालीन सफाई कर्मी सहित समस्त ग्रामवासियों, पालकों एवं छात्र-छात्राओं का विशेष योगदान रहा।



