बच्चों का सर्वांगीण विकास ही समाज और राष्ट्र की असली पूंजी: मनीषा योगेश वंशकार
आत्मानंद स्कूल में रंगारंग वार्षिकोत्सव; सुआ, कर्मा और लोकधुनों पर थिरके बच्चे, जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की पहचान , बच्चों के आत्मविश्वास से सजा सांस्कृतिक मंच

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय सीपत में आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम रंग, उमंग और सांस्कृतिक विविधता से सराबोर रहा। विद्यार्थियों ने सुआ, कर्मा, पंजाबी सहित विभिन्न पारंपरिक लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ देकर उपस्थित जनसमूह का दिल जीत लिया। आकर्षक वेशभूषा, सटीक तालमेल और आत्मविश्वास से भरी प्रस्तुतियों ने विद्यालय परिसर को उत्सव में बदल दिया। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि चंद्रप्रकाश सूर्या, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि श्रीमती शांति धीवर, भाजपा जिला ग्रामीण उपाध्यक्ष राज्यवर्धन कौशिक, सरपंच श्रीमती मनीषा योगेश वंशकार, उपसरपंच श्रीमती श्यामा साहू, पूर्व मंडल अध्यक्ष एवं एसएमडीसी अध्यक्ष बांके बिहारी गुप्ता, मंडल उपाध्यक्ष अभिलेश यादव, मन्नू सिंह, मदनलाल पाटनवार, एवं शिव यादव उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता शाला की प्राचार्या श्रीमती सरिता यादव ने की।
विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, व्यक्तित्व निर्माण की पाठशाला। जिपं. सदस्य प्रतिनिधि चंद्रप्रकाश सूर्या
जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि चंद्रप्रकाश सूर्या एवं एसएमडीसी अध्यक्ष बांके बिहारी गुप्ता ने संयुक्त रूप से कहा कि स्वामी आत्मानंद विद्यालय न केवल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है, बल्कि बच्चों की प्रतिभाओं को मंच देकर उनके सर्वांगीण विकास का मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करते हैं।
विद्यालयों में संस्कार और संस्कृति की शिक्षा ही बच्चों को बनाती है सच्चा नागरिक: सरपंच मनीषा योगेश वंशकार
सरपंच श्रीमती मनीषा योगेश वंशकार ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि शिक्षा ही बच्चों का भविष्य तय करती है। विद्यालयों में नैतिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति और संस्कारों की शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। आज के बच्चे ही कल के जिम्मेदार नागरिक बनेंगे, इसलिए उनके व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान देना हम सबकी जिम्मेदारी है।
हमारा लक्ष्य है शिक्षा के साथ आत्मविश्वास और संस्कार देना : प्राचार्या सरिता यादव
प्राचार्या श्रीमती सरिता यादव ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए शाला की शैक्षणिक उपलब्धियों, सह-शैक्षणिक गतिविधियों और विद्यार्थियों की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और आत्मविश्वास प्रदान करना है, जिससे वे जीवन में हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकें।
विद्यालय के वार्षिकोत्सव में भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं की सजीव झलक देखने को मिली। छत्तीसगढ़ी, मराठी, बंगाली, गुजराती, राजस्थानी लोकनृत्य, पंथी, कर्मा, सुआ नृत्य, शिक्षाप्रद नाटकों का मंचन, ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ तथा ‘नशामुक्त समाज’ जैसे सामाजिक संदेशों पर आधारित प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को प्रेरणादायी बना दिया। वार्षिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को अतिथियों ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन वरिष्ठ व्याख्याता संतोष सिंह ने किया तथा आभार प्रदर्शन व्याख्याता लोभेराम साहू ने व्यक्त किया। आयोजन की सफलता में शाला के सभी शिक्षकगण, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राओं का सराहनीय योगदान रहा। वार्षिकोत्सव का यह आयोजन विद्यालय परिवार, जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों के सामूहिक सहयोग का जीवंत उदाहरण बनकर यादगार बन गया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और विद्यालय के सतत प्रगति पथ पर अग्रसर रहने की शुभकामनाएँ दीं।




