‘जहरीले कचरे’ पर सुको ने मप्र सरकार से मांगा जवाब
Suco sought response from MP government on 'toxic waste'

जबलपुर। भोपाल गैस त्रासदी के बाद से बंद पड़ी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के कचरे के पीथमपुर में निष्पादन पर विवाद बढ़ गया है। जबलपुर हाई कोर्ट ने सरकार को इस कचरे के निष्पादन के लिए ट्रायल की अनुमति दे दी थी, लेकिन पीथमपुर के निवासी इस फैसले से सहमत नहीं थे। याचिकाकर्ता संदीप रघुवंशी का कहना है कि इस प्रक्रिया से पीथमपुर के लिए जोखिम बढ़ सकता है और इसे विनाश की ओर ले जा सकता है।
रघुवंशी ने बताया कि उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की है, और उन्हें उम्मीद है कि शीर्ष अदालत इस मुद्दे पर ट्रायल रन पर रोक लगाएगी। उनका कहना है कि यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा पीथमपुर में लाकर उसे निष्पादित करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा, हमने याचिका दायर की थी और मंगलवार को मामले की सुनवाई हुई। न्यायालय ने हमें सुना और अगली तारीख तय की है, जिसमें इस पर निर्णय हो सकता है। हम सुप्रीम कोर्ट भी गए हैं, जहां से मध्य प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया गया है।
पीथमपुर के निवासियों का आरोप है कि इस कचरे के निष्पादन से इलाके में प्रदूषण बढ़ सकता है, जिससे स्थानीय लोगों की स्वास्थ्य समस्याएं और बढ़ सकती हैं। कुछ स्थानीय कंपनियां भी इस मुद्दे पर विरोध जता रही हैं और कचरे के निष्पादन के खिलाफ हैं। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पिछले साल दिसंबर में जहरीले कचरे को न हटाने को दुखद बताते हुए, साइट को तुरंत साफ करने और कचरे के सुरक्षित निपटान के आदेश दिए थे। इसके साथ ही, 6 जनवरी के आदेश में पीथमपुर संयंत्र में कचरा निपटान के बारे में मीडिया को गलत सूचना प्रकाशित करने से रोका गया था।


