छत्तीसगढ़

एकेडमिक हाइट्स पब्लिक स्कूल में मनाई गई अंबेडकर जयंती

हनुमान प्रकटोत्सव के अवसर पर छात्रों ने किया हनुमान चालीसा का पाठ

मनेंद्रगढ़ (आशुतोष चतुर्वेदी)। जिले के प्रतिष्ठित विद्यालय एकेडमिक हाइट्स पब्लिक स्कूल मनेंद्रगढ़ में अंबेडकर जी की 134 वीं जयंती को समानता दिवस के रूप में मनाया गया।


हनुमान प्रकटोत्सव के शुभ अवसर पर विद्यालय के छात्रों द्वारा सर्वप्रथम हनुमान चालीसा का पाठ किया गया, तत्पश्चात कार्यक्रम की शुरुआत संस्था की संचालिका श्रीमती आशि कक्कड़, श्रीमती ज्योति ताम्रकार, श्रीमती तोशी अग्रवाल व प्राचार्य श्री पी.रविशंकर द्वारा संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के चित्र पर माल्यार्पण कर व द्वीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में कक्षा 12वीं की छात्रा हनमीत कौर व कक्षा 8वीं की छात्रा अवनी तिवारी द्वारा बाबासाहेब अंबेडकर जी के जीवन पर अपने भाषण द्वारा प्रकाश डालते हुए बताया गया कि भीमराव आंबेडकर जी का जन्म 14 अप्रैल 1891 में मध्य प्रदेश के मऊ कस्बे में हुआ। वर्ष 1913 में इन्होंने कोलम्बिया यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पर स्नातक किया। 1927 में इन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में पीएचडी किया। 30 अगस्त 1947 को ये भारतीय संविधान के प्रारूप समिति के अध्यक्ष बनाए गए। तत्पश्चात कक्षा 9वीं ब के छात्र राजवीर, युग, अक्षत, मानसी, पलक, अंशिका द्वारा संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों से सभी छात्रों को अवगत कराया गया। साथ ही कक्षा दसवीं की छात्रा तमन्ना टोप्पो द्वारा नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों की जानकारी दी गई।
इसके पश्चात कक्षा आठवीं के छात्र निखिल, तन्वी, बिरासी, एंजेल, अदिति, तनीषा, हयात, अरनव, शिवांश, अंश कक्षा सातवीं से अवनी, अंशिका, चिराग द्वारा बाबासाहेब के प्रेरक उद्धरणों को चित्रों द्वारा बताया गया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में कक्षा सातवीं से गुरनूर, तनीषा, सान्वी, आयुषी, स्वाति द्वारा बाबासाहेब के जीवन पर प्रेरक कविता का वाचन कर आकर्षक प्रस्तुति दी गई। संस्था के प्राचार्य श्री पी रविशंकर ने अपने अभिभाषण में छात्रों को बताया कि डॉ. अंबेडकर जी का जीवन सिर्फ शिक्षा या संविधान तक सीमित नहीं था, वह एक सामाजिक क्रांतिकारी थे। उन्होंने जीवनभर छुआछूत, जातिवाद और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ लड़ाई में हिस्सा लिया। उन्होंने दलितों, महिलाओं और वंचितों को आत्मसम्मान और अधिकार दिलाने के लिए अनेक आंदोलन चलाए। विद्यालय के कोऑर्डिनेटर सुश्री रूबी पासी ने बाबा साहेब जी के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को बताया कि डॉ. अंबेडकर को भारतीय संविधान का शिल्पकार कहा जाता है। उन्होंने भारत के संविधान की रचना करते समय यह सुनिश्चित किया कि देश के प्रत्येक नागरिक को – चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, भाषा या वर्ग से हो – समानता, न्याय और स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त हो। उनका संविधान आज भी हमारा सबसे मजबूत लोकतांत्रिक आधार है।
सामाजिक विज्ञान की प्राध्यापिका श्रीमती आकांक्षा मसीह ने छात्रों को बताया कि बाबा भीमराव अंबेडकर को बचपन से ही आर्थिक और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा परंतु मेहनत लगन और संघर्ष से उन्होंने सफलता प्राप्त की। कार्यक्रम के अंत में कक्षा सातवीं की छात्रा तन्वी सिंह द्वारा भारतीय संविधान की प्रस्तावना जो कि संविधान का सार रूप है, वाचन किया गया जिसे विद्यालय के समस्त विद्यार्थियों द्वारा शपथ के रूप में ग्रहण की गया। कार्यक्रम का संचालन संस्था की शिक्षिका सुश्री राखी तिवारी द्वारा किया गया व कार्यक्रम का निर्देशन शिक्षिका रूबी पासी, आकांक्षा मसीह, मनोज केसरवानी, आनंद विश्वकर्मा, नागमणि पिंटू, सुनील मिश्रा, श्रुति सोनी सलेहा परवीन, माधुरी महिडिया, यासमीन, इरफाना सूर्या, रंजना, अरुणा, निखत अहमद, प्रिया चक्रवर्ती, प्रतिमा, बुद्धेश्वर जायसवाल, सोनम निषाद, विनोद, शिवानंद, विनय, अमनदीप, अमरनाथ राव, नाहिद मनीषा संतोष, गणेश, सुशील सोनी आदि द्वारा किया गया।

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