छत्तीसगढ़

67 वर्षीय कमला मंगतानी ने वेटलिफ्टिंग में दुबई जाकर तीन गोल्ड एक सिल्वर मेडल हासिल की

नगरवासियों में खुशी की लहर

मनेंद्रगढ़ 4 मई (सुरेंद्र गुप्ता)। जब किसी व्यक्ति में दृढ़ इच्छा शक्ति ,आत्मविश्वास, अटूट संकल्प और आत्म बल बलवती हो और उसमें कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो वह व्यक्ति कुछ न होने पर भी वह सब कुछ पा लेता है। यह कहावत मनेंद्रगढ़ की 67 वर्षीय कमला देवी ने विदेश जाकर गोल्ड मेडल, कास्य मेडल ,अनेक स्मृति चिन्ह प्राप्त कर अपने परिवार की ही नहीं, वरन अपने शहर, अपने क्षेत्र, अपने राज्य, और अपने देश का नाम रोशन कर एक नया आयाम से जुड़ कर जीवन की एक नया अध्याय प्रारंभ करती है।


शहर की महिला कमला देवी मंगतानी ने इस बात की जानकारी एक प्रेस वार्ता के दौरान अपने निज निवास में पत्रकारों से साझा करती हुई अपने जीवन के कुछ पहलुओं को उजागर करते हुए बताया कि लगभग 30 वर्ष पूर्व में वह शुगर जैसी जटिल बीमारियों से जूझ रही थी और अपने इस शुगर बीमारी की इलाज के लिए वह कई बड़े शहरों में जाकर डॉक्टर से मिली और इस दौरान शुगर के कारण उनके दोनों घुटनों ने भी काम करना बंद कर दिया था और घुटनों में दर्द पढऩे लगा था, तब उन्होंने जबलपुर जाकर डॉक्टर से मिले डॉक्टर ने उनकी जांच की और शुगर की स्थिति देखकर उनसे कहा कि आप घुटने बदलवा दीजिए और डॉक्टरों ने उनके दोनों हाथ में बैसाखी पकड़ा दी। परंतु ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। उन्होंने दर्द के बावजूद भी धीरे-धीरे बैसाखी के सहारे चलना प्रारंभ किया।
इसी बीच उनके अंदर पनप रहे आत्मविश्वास ने उड़ान की इच्छाएं बलवती होती गई और आखिर में उन्होंने अपनी वैशाखी को छोड़ा और अपने पैरों पर खड़ा होकर धीरे-धीरे चलना प्रारंभ किया और कुछ कर गुजरने की दिल में तमन्ना लिए वह चलती ही गई। इसी बीच उन्होंने जिम भी ज्वाइन कर लिया और लगातार जिम जाकर अभ्यास करने लगी। जिस उम्र में लोगों को डॉक्टर जिम जाने से रोकते हैं उन्होंने अपने कौशल को जिम में ढाल लिया और लगातार 5 वर्षों से जिम में जाकर अपना अभ्यास करती रही। आखिरकार जिम ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और वे वेट लिफ्टिंग जैसे कठिन व्यायाम को करने, अपने को चुस्त दुरुस्त बनाने में लग गई और अंत में उनकी यह मेहनत, लगन आत्मविश्वास ने उनके अंदर कुछ कर गुजरने की तमन्ना लिए हुए स्थानीय स्तरों में वेट लिफ्टिंग प्रतियोगिताओं में भाग लेना प्रारंभ कर दिया और वे अपनी इन प्रतियोगिताओं को आगे बढ़ते हुए धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय मंचों में पहुंचकर अपनी प्रतिभा दिखने लगी।
उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 100 से अधिक गोल्ड मेडल जीत चुकी है इन पुरस्कारों में राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्त्रीय प्रतियोगिताएं प्रमुख रही है। अभी-अभी हाल में उनकी गौरवपूर्ण प्रतियोगिता दुबई में 11 वें अंतरराष्ट्रीय खेल समारोह में प्राप्त हुई। संयुक्त भारतीय खेल फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस खेल का आयोजन दुबई स्पोर्ट्स काउंसिल के सानिध्य में 22 से 28 अप्रैल के बीच संपन्न किया गया जिसमें दुनिया भर के प्रतियोगिताओं ने पार्टिसिपेट किया भारत से कमला देवी ने प्रतिनिधित्व करते हुए तीन गोल्ड मेडल एक कांस्य पदक अपने नाम ,अपने देश के नाम किया।
उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि को न केवल भारत वरन छत्तीसगढ़ राज्य और विशेष रूप से मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले का नाम रोशन कर इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षर से जड़ा। पत्रकारों से चर्चा के दौरान 67 वर्षी कमला देवी ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि हमने आज तक जितनी भी प्रतियोगिताएं में भाग ली उसके लिए हमारे सरकार ने हमारी कोई मदद नहीं की, घर से पैसे लगाकर हमने यह मेडल हासिल किया जिसका हमें दुख है। एक तरफ तो सरकार कहती है कि खेल के लिए सरकार सभी को प्रोत्साहित एवं सहयोग देती आ रही है और आगे भी देगी। परंतु यह दोनों बातों से हमें आसमानता की झलक मिलती है । सरकार को चाहिए कि ऐसे लोगों को आगे बढक़र उसमें उनके आत्मा बल को बढ़ावा देनी चाहिए।

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