छत्तीसगढ़

कुएं में करंट बना काल: मेंढक निकालने उतरे बेटे को बचाने कूदा पिता, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला मौत का राज

मेंढक के बहाने मौत! कुएं में करंट से पिता-पुत्र की गई जान

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। सीपत थाना क्षेत्र के ग्राम ऊनी में सोमवार की शाम जो हादसा हुआ, उसने पूरे गांव को सन्न कर दिया। आंगन में बने रिंग सिस्टम वाले कुएं से आ रही बदबू के कारण 15 वर्षीय अंशु वैष्णव उसमें उतरा और देखते ही देखते उसकी जान चली गई। बेटे को तड़पता देख 40 वर्षीय पिता कैलाश दास गोस्वामी भी उसे बचाने कूदे, लेकिन दोनों की लाशें पानी में तैरती मिलीं। गांव में चर्चा थी कि आखिर यह मौत डूबने से हुई या जहरीली गैस का असर था या फिर बिजली का करंट? अब इस रहस्यमयी मौत का राज़ पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोल दिया है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासा: पानी में फैले करंट से गई जान

मस्तूरी बीएमओ डॉ. अनिल सिंह ने पुष्टि की है कि मौत की वजह कुएं में फैला बिजली करंट था। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों के शरीर पर करंट लगने के स्पष्ट संकेत मिले – अंशु की नाक और कान से झुलसने के निशान और खून का काला पड़ जाना, यह दर्शाता है कि हादसा डूबने से नहीं, करंट की चपेट में आने से हुआ।

बेटे को बचाने पिता ने लगाई छलांग, पर नहीं बचा सके जीवन

कैलाश, जो ट्रक ड्राइवर थे, उसी दिन अमोदी (बलौदाबाजार) से घर लौटे थे। शाम करीब 5 बजे उनका बेटा अंशु कुएं में मरे मेंढक को निकालने उतरा, पर अचानक उसकी आवाज बंद हो गई। कुएं में झांकने पर कैलाश ने बेटे को तड़पते देखा और तत्काल उसे बचाने कूद गए, लेकिन कुछ ही मिनटों में दोनों की सांसें थम गईं। घर में बीमार पत्नी किरण यह मंजर देखकर बेसुध हो गईं।

बिजली कनेक्शन बना काल का कारण

परिवार के छोटे बेटे आर्यन (कक्षा 7वीं) के अनुसार, मामा के घर से लौटने के बाद घर का बिजली कनेक्शन फिर से चालू किया गया था। सबमर्सिबल पंप ऑन करते ही बिजली चली गई, लेकिन पानी में करंट बना रहा। इसी बीच अंशु कुएं में उतरा और हादसा हो गया।

क्या है रिंग सिस्टम कुआं?

यह विशेष प्रकार का कुआं लगभग 20-25 फीट गहरा और 3 फीट चौड़ा होता है, जिसमें लोहे या पत्थर की सीढिय़ों के जरिए नीचे जाया जाता है। हादसे वाले कुएं में सिर्फ 5 फीट पानी था, जो डूबने के लिए पर्याप्त नहीं था – इसीलिए करंट की आशंका सही साबित हुई।

सांस चल रही है कहकर दौड़े अस्पताल, लेकिन…

जब ग्रामीणों ने देखा कि शायद अंशु की सांसें चल रही हैं, तो उसे बलौदा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कैलाश का शव रात में घर पर ही रखा गया और अगली सुबह दोनों का पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार किया गया।

गांव में शोक की लहर, हर आंख नम

बाप-बेटे की एक साथ हुई दर्दनाक मौत ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। ग्रामीणों की आंखों में आंसू हैं और हर कोई इस हादसे को लेकर शोकाकुल है।

Related Articles

Back to top button