नशे के खिलाफ परसाही की महिलाओं ने गांव में निकाली रैली, टीआई सतपथी बोले, ‘अब नशे का खात्मा तय है’

जागी परसाही की महिलाएं- गूंजे नारे, थर्राए नशे के सौदागर!
सीपत (हिमांशु गुप्ता)। ग्राम पंचायत परसाही में एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला जब गांव की महिलाएं नशे के विरुद्ध एकजुट होकर सडक़ों पर उतर आईं। ‘गांव को नशामुक्त बनाना है , नशे पर पाबंदी लगाओ’ जैसे बुलंद नारों के साथ महिलाएं और बच्चे गांव की गलियों से होते हुए एकजुटता का परिचय दे रहे थे।
इस रैली की विशेष बात यह रही कि इसमें सिर्फ युवा महिलाएं ही नहीं, बल्कि बुजुर्ग महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भी पूरी तन्मयता से शामिल हुए। यह रैली न केवल एक सामाजिक आंदोलन थी, बल्कि यह संदेश भी दे रही थी कि अब गांव के लोग नशे को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।
महिलाओं के इस जनजागरण अभियान में सीपत थाना प्रभारी गोपाल सतपथी स्वयं शामिल हुए और ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि परसाही की मातृशक्ति ने जो संदेश दिया है, वह पूरे सीपत क्षेत्र के लिए प्रेरणा है। हम पुलिस प्रशासन की ओर से आश्वस्त करते हैं कि किसी भी हालत में गांव में नशे का कारोबार नहीं पनपने दिया जाएगा। जो भी नशा बेचता या करता है, वह अब सावधान हो जाए – परसाही की महिलाएं जाग चुकी हैं। उन्होंने आगे कहा कि गांव की सुरक्षा और शांति बनाए रखने में पुलिस के साथ-साथ आम जनता का सहयोग जरूरी है, और आज परसाही ने दिखा दिया कि जब समाज जाग जाता है, तो कोई बुराई टिक नहीं सकती।
इस अभियान में एएसआई भारत सिंह मरकाम, कौशल वस्त्रकार, मनहरण सिंह ठाकुर, लक्ष्मण चंद्रा, अमीर अंचल, श्रीमती गायत्री, पवन कुमार धनुहार (सरपंच परसाही) सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण पुरुष और महिलाएं उपस्थित रहे। महिलाओं में प्रमुख रूप से बालेश्वर पाटनवार, धनदास महंत, कैलाश गोस्वामी, शिवचंद यादव, राधेश्याम विश्वकर्मा, मंगल सिदार, श्याम मंहत, कविता गोस्वामी, मनीषा पाटनवार, कृष्णा बाई मंहत, प्रभा महंत, उदबासा यादव, परमेश्वरी सिदार, रानी गोस्वामी, रनिया मंहत, शुक्रिता सिदार जैसी जागरूक महिलाएं शामिल रहीं। महिलाओं ने एक स्वर में यह भी मांग की कि गांव में किसी भी प्रकार से शराब, गांजा, नशीली दवाओं आदि का अवैध क्रय-विक्रय तुरंत रोका जाए। यह रैली मात्र एक आयोजन नहीं था, यह था परसाही की महिलाओं का नशे के विरुद्ध छेड़ा गया ‘महायुद्ध’, जिसमें उनका उत्साह, संकल्प और साहस काबिल-ए-तारीफ रहा।



