सडक़ कौन बनाएगा? तय नहीं… नरगोड़ा गांव अब भी पगडंडी पर!
सरकारी फाइलों में उलझा नरगोडा-पोड़ी मार्ग, ग्रामीण बेहाल

स्कूल बच्चे सहित राहगीरों की जान जोखिम में…… सडक़ निर्माण की जिम्मेदारी तय नहीं, ग्रामीणों की उम्मीद अधर में!
वर्षों से जर्जर हालत में नरगोडा-पोड़ी-कर्मा-बसहा मार्ग, बरसात में हालात बद से बदतर, विभागों के पाले में फंस गया विकास
सीपत (हिमांशु गुप्ता)। सीपत के समीप नरगोड़ा गांव से पोड़ी, कर्मा, बसहा को जोडऩे वाला लगभग 1.5 किलोमीटर लंबा संपर्क मार्ग सालों से बदहाली का शिकार है। बरसात के इन दिनों में यह सडक़ एक बार फिर कीचड़, गड्ढों और पानी के दलदल में तब्दील हो चुकी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह मार्ग नहीं बल्कि ‘संकट का सफर’ बन चुका है। गांव के बुजुर्गों से लेकर स्कूली छात्र तक, सभी सालों से इस सडक़ के सुधरने की उम्मीद में बैठे हैं। लेकिन कई बार आवेदन, शिकायत, गुहार और जनप्रतिनिधियों से आग्रह के बावजूद भी इस सडक़ की किस्मत नहीं बदली।
न तो पीडब्ल्यूडी माने, न पंचायत, न वन विभाग… तो फिर जिम्मेदार कौन?
इस सडक़ के निर्माण को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इसे बनवाए कौन? ग्रामीणों ने जब भी आवेदन लेकर संबंधित अधिकारियों के पास दस्तक दी तो उन्हें इधर से उधर दौड़ाया गया , वन विभाग कहता है, यह पीडब्ल्यूडी के अधीन है पीडब्ल्यूडी कहता है, ये पंचायत क्षेत्र में आता है। पंचायत कहती है, भूमि वन भूमि है, हम क्या करें। तीनों विभागों के बीच इस सडक़ का भविष्य अधर में लटका है।
नरगोड़ा की जनता कहां जाए?
ग्रामीणों का कहना है कि वे सरपंच से लेकर जनपद सदस्य, विधायक, कलेक्टर तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ ‘आश्वासन’ मिला है, आश्वासन पर कार्य नहीं। ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग से बच्चे सीपत स्कूल , कॉलेज पढऩे जाते हैं, कीचड़ में फिसलकर गिर जाते हैं, महिलाएं खेत-खलिहान तक नहीं जा पा रही, बीमार को अस्पताल ले जाने में कठिनाई होती है, फिर भी कोई हमारी सुनवाई नहीं कर रहा।
बरसात में तबाही — हादसों की सडक़ बनी नरगोडा की पगडंडी
सडक़ में बने गहरे गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने से आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। दोपहिया वाहन चालकों को तो अपनी जान हथेली पर रखकर इस मार्ग से गुजरना पड़ता है। गांव के हर मोहल्ले के लोग प्रभावित हैं, खासकर छात्र-छात्राएं और बुजुर्ग।
‘सबसे व्यस्त मार्ग है, फिर भी उपेक्षित क्यों?’
यह मार्ग ठरकपुर, पोड़ी, कर्मा, बसहा, बेलतरा जैसे कई गांवों को सीपत से जोड़ता है। दैनिक आवागमन में इस मार्ग की भूमिका महत्वपूर्ण है, फिर भी इसे प्राथमिकता सूची में शामिल नहीं किया गया। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि कम आबादी वाले क्षेत्र की सडक़ों को बनाया जा रहा है, लेकिन इस व्यस्त मार्ग को आखिर क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है?
ग्रामीणों की चेतावनी — यदि अब भी सडक़ नहीं बनी, तो होगा आंदोलन
गांव वालों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द इस मार्ग के निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं होती तो वे प्रशासन के खिलाफ आंदोलन छेड़ेंगे। अब शब्द नहीं, कार्य चाहिए।
ये है ग्रामीणों की प्रमुख माँगें
सडक़ निर्माण की जिम्मेदारी तय कर विभाग का स्पष्ट निर्धारण किया जाए, मार्ग को तत्काल मरम्मत या नई सडक़ के रूप में स्वीकृति दी जाए , बरसात के सीजन में तात्कालिक राहत हेतु गड्ढों को मिट्टी व गिट्टी से भरा जाए , शासन-प्रशासन की उच्चस्तरीय टीम स्थल निरीक्षण करे।



