छत्तीसगढ़

एनटीपीसी के 51वें स्थापना दिवस पर सीपत में जलेगा ‘संघर्ष का दीया’ — क्षेत्रवासी करेंगे शांतिपूर्ण सत्याग्रह

एनटीपीसी चमक रहा है, पर हमारे गांव अब भी अंधेरे में— आठ भूविस्थापित ग्रामों के सरपंचों का एक स्वर

सीपत नवाडीह चौक में कल शाम 7 बजे कैंडल जलाकर जताया जाएगा विकास की अनदेखी पर विरोध

सीपत (हिमांशु गुप्ता) । एनटीपीसी सीपत के 51वें स्थापना दिवस पर इस बार उत्सव नहीं, बल्कि शांति का सत्याग्रह देखने को मिलेगा। क्षेत्र के आठ भूविस्थापित ग्रामों के जनप्रतिनिधियों ने एक साथ आकर एनटीपीसी प्रबंधन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि एनटीपीसी की रोशनी से देश जगमगा रहा है, लेकिन जिन गांवों ने अपनी जमीनें दीं, वे आज भी अंधेरे और उपेक्षा में हैं।
जनप्रतिनिधियों ने बताया कि 7 नवंबर, शुक्रवार शाम 7 बजे नवाडीह चौक, सीपत में सभी ग्रामीण, व्यापारी, युवा और नागरिक मिलकर कैंडल जलाकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज करेंगे। यह विरोध किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि। क्षेत्र के विकास और समान अधिकार की भावना से प्रेरित है। इनकी मुख्य मांगे भूविस्थापितों को स्थायी रोजगार , ग्रामों में सडक़, जल व स्वास्थ्य सुविधाएं , स्वच्छता और पशु संरक्षण व्यवस्था , स्थानीय विद्युत सुधार व गांवों का विद्युतीकरण है।
सीपत सरपंच मनीषा योगेश वंशकार ने भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि हो सकता है हम अलग-अलग विचारधाराओं से आते हों, पर जब बात हमारे क्षेत्र के विकास की हो तो हम सभी एक हैं। हम किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए खड़े हैं। अगर कोई व्यक्तिगत रूप से कार्यक्रम में नहीं आ सकता, तो केवल 7 मिनट के लिए अपने घर या दुकान की लाइट बंद करें और एक दिया जलाएं। यह दिया ‘विकास’ और ‘समानता’ की रोशनी का प्रतीक होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण सत्याग्रह के रूप में किया जाएगा, ताकि एनटीपीसी प्रबंधन यह महसूस करे कि जिस क्षेत्र ने उन्हें भूमि और समर्थन दिया, उस क्षेत्र का भी विकास होना चाहिए। सीपत सरपंच प्रतिनिधि योगेश वंशकार ने बताया कि इस अवसर पर आठ प्रभावित ग्रामों के सरपंच नवाडीह चौक में एक साथ उपस्थित रहेंगे। सभी का उद्देश्य एक ही है — सीपत क्षेत्र का संतुलित विकास और गांव-गांव में उजियारा। एनटीपीसी की रोशनी भले ही देश को चमकाए, पर अब समय है कि उसकी चमक सीपत के हर घर, हर गली तक पहुंचे।

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