छत्तीसगढ़

एनटीपीसी स्थापना दिवस पर सीपत में मशाल रैली से गरजा जनाक्रोश ,‘रोशनी अंदर, अंधेरा बाहर — कब होगा सबका विकास?’, ग्रामीणों का सवाल

स्थानीय युवाओं को रोजगार, सडक़ों की मरम्मत और प्रदूषण नियंत्रण की रखी मांग — जनप्रतिनिधियों ने कहा अब जवाब दे एनटीपीसी प्रबंधन , एनटीपीसी के विरोध में सीपत रहा ब्लैकआउट

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। एनटीपीसी सीपत जिसे ‘ऊर्जा नगरी’ कहा जाता है और जो कई राज्यों को बिजली पहुंचाती है, शुक्रवार की रात खुद अंधेरे में डूब गई। कारण था—एनटीपीसी के 51 वें स्थापना दिवस पर ग्रामीणों द्वारा किया गया शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन।
एनटीपीसी परिसर जहां रंग-बिरंगी रोशनी में जगमगा रहा था, वहीं बाहर के गांवों में मशालों की लौ से असंतोष की लपटें उठ रही थीं। नवाडीह चौक से लेकर एनटीपीसी मटेरियल गेट तक ग्रामीणों ने मशाल जुलूस निकालते हुए एनटीपीसी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। पूरा सीपत क्षेत्र 10 मिनट तक लाइट बंद कर ‘ब्लैकआउट विरोध’ में शामिल हुआ।

एनटीपीसी की चमक कॉलोनी की दीवारों तक सीमित

क्षेत्रवासियों ने कहा कि एनटीपीसी की रोशनी और चमक केवल उसकी कॉलोनी की चारदीवारी तक सीमित है। सीपत, जांजी, कौडिय़ा, रॉक, देवरी, रलिया, कर्रा, गतौरा जैसे गांव अब भी अंधेरे, बेरोजगारी और उपेक्षा के साये में हैं। एनटीपीसी ने विकास के नाम पर सिर्फ दिखावा किया है। असली विकास तो प्रभावित गांवों तक कभी पहुँचा ही नहीं। ग्रामीणों ने बताया कि राखड़ डैम से उड़ती धूल, टूटी सडक़ें, जल निकासी व कचरा प्रबंधन की अव्यवस्था और बेरोजगारी आज भी क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्याएं हैं।

जनप्रतिनिधियों ने रखीं 8 बड़ी मांगे

प्रदर्शन के दौरान जनप्रतिनिधियों ने एनटीपीसी प्रबंधन से इन प्रमुख मांगों को सामने रखा जिसमें स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए , राखड़ डैम से उड़ते धूल और प्रदूषण पर रोक लगाई जाए , दलदल प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा दिया जाए , कचरा प्रबंधन व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए , घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए , स्थानीय मजदूरों के शोषण पर रोक लगे , सीएसआर फंड की राशि वास्तव में स्थानीय विकास पर खर्च हो , सडक़ निर्माण की गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी रखी जाए।

अब वक्त आ गया है — हक की लड़ाई खुद लडऩी होगी

जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र धीवर ने कहा कि अब क्षेत्र की जनता को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपने हक के लिए संघर्ष करना होगा। रैली के नेतृत्व कर रहे सीपत सरपंच प्रतिनिधि योगेश वंशकार ने कहा कि एनटीपीसी को जवाब देना होगा कि 25 साल की रोशनी में भी आसपास के गांव क्यों अंधेरे में हैं। यदि जल्द समाधान नहीं मिला तो और भी बड़े सत्याग्रह आंदोलन होंगे।

इन जनप्रतिनिधियों ने की अगुवाई

इस विरोध प्रदर्शन को सफल बनाने में प्रमुख रूप से योगेश वंशकार (सरपंच प्रतिनिधि, सीपत) राजेंद्र धीवर (जिला पंचायत सदस्य) , दीपक शर्मा (भाजपा मंडल अध्यक्ष) , मनोज खरे (जनपद सभापति) , राजेंद्र पाटले (सरपंच प्रतिनिधि, जांजी) , संजय पटेल (सरपंच प्रतिनिधि, कर्रा) , रूपचंद्र राय (सरपंच प्रतिनिधि, देवरी) , विक्रम प्रताप सिंह (सरपंच, रॉक) , धनेश्वर साहू (सरपंच प्रतिनिधि, कौडिय़ा) , तामेश्वर सिंह कौशिक, अभिलेश यादव, मन्नू सिंह, अशोक सूर्यवंशी (पूर्व जिला पंचायत सदस्य), विजय गुप्ता (सदस्य, जनपद पंचायत मस्तूरी), हरिकेश गुप्ता, संतोष भोई, राज्यवर्धन कौशिक, उमेश चंद्राकर, राजू सूर्यवंशी, शशिकांत साहू, संदीप खरे, लच्छी वर्मा, प्रेम खरे, सुनील पटेल (अध्यक्ष, मस्तूरी विधानसभा युवा कांग्रेस) सहित क्षेत्र के अन्य उपसरपंच, पंच एवं सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।

सीपत की राख में छिपा है बदलाव का बीज

विरोध में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि हम वो हैं जो बिजली बनाते हैं, पर हमारे घर अब भी अंधेरे में हैं। एनटीपीसी को अब क्षेत्र के विकास की वास्तविक जिम्मेदारी निभानी होगी। इस मशाल रैली में बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामों के साथ क्षेत्रवासियों ने शामिल होकर एनटीपीसी के खिलाफ अपना समर्थन दिया।

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