पशुधन विभाग ने घर घर जाकर पशुओं को लगाए 92 हजार से अधिक टीके

रायपुर। पशुधन को खुरपका-मुंहपका, गलघोंटू, और लंगड़ा बुखार जैसी घातक बीमारियों से बचाने के लिए समय पर टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय है। इससे न केवल पशुओं की असमय मृत्यु रुकती है, बल्कि उनका दूध व मांस उत्पादन भी सुरक्षित रहता है। पशु चिकित्सा टीकों का महत्व सुरक्षित और कुशल खाद्य उत्पादन तथा पशुओं और मनुष्यों में उभरती और दुर्लभ बीमारियों के नियंत्रण में निहित है। पशु चिकित्सा टीकों का उपयोग पशुधन और मुर्गीपालन में पशु स्वास्थ्य बनाए रखने और समग्र उत्पादन में सुधार के लिए किया जाता है।
मानसून की पहली दस्तक के साथ ही बस्तर के वनांचल जिले नारायणपुर में पशुपालकों की धडक़नें तेज हो जाती थीं। बारिश की फुहारों के साथ घड़सरा, एकटंगिया, लंपी स्किन डिजीज और एंटेरोटॉक्सिमिया जैसी जानलेवा संक्रामक बीमारियों का साया मंडराने लगता था। ये बीमारियां न केवल पशुओं का स्वास्थ्य छीनती थीं, बल्कि दूध उत्पादन घटाकर और इलाज का खर्च बढ़ाकर गरीब पशुपालकों की आजीविका पर भी भारी चोट करती थीं। लेकिन इस वर्ष मानसून की शुरुआत में ही नारायणपुर जिले ने बीमारी के इस खतरे के खिलाफ एक मजबूत श्सुरक्षा कवचश् तैयार कर लिया।
राज्य शासन की मंशा के अनुरूप कलेक्टर के मार्गदर्शन और उपसंचालक के नेतृत्व में पशुधन विकास विभाग ने 1 जुलाई 2026 से जिलेभर में एक वृहद व सघन नि:शुल्क टीकाकरण अभियान का आगाज किया। विभाग की 10 पशु चिकित्सालय एवं औषधालयों की टीमों ने केवल कस्बों तक सीमित न रहकर दूरस्थ, दुर्गम और वनांचल गांवों का रुख किया। बारिश की परवाह किए बिना मैदान में उतरे अमले ने न केवल चौपालों पर जागरूकता फैलाई, बल्कि श्डोर-टू-डोरश् पहुंचकर पशुधन को सुरक्षा टीके लगाए।



