आंकलन शिविर समावेशी शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम: बीईओ टंडन
मस्तूरी में दिव्यांग बच्चों के लिए लगा विशेष आकलन शिविर; 106 बच्चों की हुई स्वास्थ्य जांच व उपकरणों की पहचान

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। समावेशी शिक्षा की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए 21 जुलाई दिन सोमवार को विकासखंड मस्तूरी के स्त्रोत केंद्र में दिव्यांग बच्चों के प्रथम चरण के आकलन शिविर का आयोजन किया गया।
इस शिविर का उद्देश्य विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं से ग्रसित बच्चों की शारीरिक जांच करना तथा उन्हें अनुकूल सहायक उपकरणों की पहचान और वितरण हेतु चिन्हित करना रहा। शिविर में जिला चिकित्सालय बिलासपुर से अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज साहू, बौद्धिक दिव्यांगता विशेषज्ञ डॉ. मल्लिकाखा अर्जुन (सेंदरी), नेत्र रोग विशेषज्ञ श्री सी.पी. करण, श्रवण बाधित विशेषज्ञ डॉ. मनीष श्रीवास्तव एवं नीरज शुक्ला की उपस्थिति में बच्चों की गहन जांच की गई। कार्यक्रम में समग्र शिक्षा बिलासपुर के सहायक कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अखिलेश तिवारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी शिवराम टंडन, तखतपुर से बीआरपी श्याम नारायण पांडे, स्पेशल एजुकेटर गोविंद बंदे, बीआरपी, स्पेशल एजुकेटर एवं स्त्रोत केंद्र मस्तूरी के समस्त स्टाफ की सक्रिय भागीदारी रही। शिविर में विकासखंड मस्तूरी के विभिन्न विद्यालयों से आए दिव्यांग बच्चों एवं उनके अभिभावकों ने भाग लिया।
शिविर में प्रारंभिक स्तर (कक्षा 1 से 8 तक) में अस्थि बाधित के 31 , बौद्धिक निशक्त के 36 , श्रवण बाधित 12 , दृष्टिबाधित 8 मिलाकर कुल 87 बच्चे व माध्यमिक स्तर (कक्षा 9 से 12 तक) में अस्थि बाधित के 10 , श्रवण बाधित के 7 , दृष्टिबाधित 2 मिलाकर कुल 19 बच्चे के आवेदन प्राप्त हुए। इस दौरान मस्तूरी विकासखंड शिक्षा अधिकारी शिवराम टंडन ने कहा कि दिव्यांग बच्चों के लिए यह आंकलन शिविर समावेशी शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। शिविर के माध्यम से बच्चों की जरूरतों के अनुरूप उपकरण एवं सहायक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे भी अन्य बच्चों की तरह शिक्षा में आगे बढ़ सकें। हम सभी शिक्षकों और समन्वयकों के सहयोग से इसे सफल बना पाए हैं। आने वाले समय में इस दिशा में और ठोस प्रयास किए जाएंगे। यह शिविर न केवल दिव्यांग बच्चों के लिए सहायक सिद्ध हुआ, बल्कि उनके अभिभावकों में भी आशा एवं विश्वास का संचार किया कि शिक्षा के इस क्षेत्र में उनके बच्चों को भी समान अवसर प्राप्त होंगे।


