छत्तीसगढ़

‘संस्कृति से जुडऩा ही हमारी असली शिक्षा’ : सुनील निर्मलकर

सुनील शिक्षण संस्था में पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया हरेली उत्सव

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। हरियाली, परंपरा और खेल की सरगर्मी से गुरुवार को सुनील शिक्षण संस्था, सीपत का प्रांगण जीवंत हो उठा, जब हरेली उत्सव के शुभ अवसर पर विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर भारतीय लोकसंस्कृति को जीवंत किया।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण नारियल फेंक प्रतियोगिता में बच्चों ने पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ भाग लिया। छात्र-छात्राओं ने खेल भावना के साथ पारंपरिक खेल में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिससे उत्सव में रोमांच और उमंग की लहर दौड़ गई। संस्था के संचालक सुनील निर्मलकर ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की आत्मा है। यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, परंपरा और परिश्रम के प्रति सम्मान का प्रतीक है। हम चाहते हैं कि हमारे छात्र सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि भारतीय संस्कृति की जड़ों से भी जुड़े रहें। उन्होने आगे कहा कि संस्था का प्रयास हमेशा यह रहा है कि हम बच्चों को ऐसे अवसर दें, जिससे उनमें संस्कृति के प्रति सम्मान, खेल के प्रति लगाव और जीवन मूल्यों की समझ विकसित हो। कार्यक्रम में संस्था संचालक सुनील निर्मलकर सहित समस्त शिक्षकगण व बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। सभी ने मिलकर पारंपरिक अंदाज में त्योहार की खुशियां मनाई।

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