इलेक्ट्रिक ट्रक बैटरी के इस्तेमाल से परिवहन क्षेत्र में आएगी क्रांति: गडकरी

नई दिल्ली। सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि देश में ईंधन के नये उपायों के इस्तेमाल से परिवहन क्षेत्र में तेजी से बदलाव आ रहा है और अब इलेक्ट्रिक बैटरी से चलने वाले ट्रकों के संचालन से इस क्षेत्र में जबरदस्त क्रांति आएगी और माल ढुलाई का काम सस्ता, प्रदूषणरहित और ज्यादा आसान हो जाएगा।
श्री गडकरी ने बुधवार को हरियाणा में सोनीपत के गांव पांची गुजरान में देश के पहले वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक ट्रक बैटरी स्वैपिंग और चार्जिंग स्टेशन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि ट्रकों के लिए इलेक्ट्रिक बैटरी के निर्माण से परिवहन की दर बहुत कम हो जाएगी। जिस दर पर बड़े ट्रक डीजल ईंधन से चलते हैं उसके मुकाबले बहुत कम दाम पर अब इलेक्ट्रिक ट्रक अपने गंतव्य तक पहुंच पाएंगे और इससे लॉजिस्टिक खर्च बहुत कम हो जाएगा। इससे ट्रांसपोर्टर का बहुत पैसा बचेगा और इसका सीधा फायदा उपभोक्ता को होगा।
श्री गडकरी ने कहा कि इस समय पेट्रोल डीजल आदि ईंधन का बड़े स्तर पर आयात किया जाता और इस पर 25 लाख करोड़ रुपए खर्च होते हैं। इस कारण देश में वायु प्रदूषण की भी समस्या पैदा होती है। अब ट्रांसपोर्ट में बड़े ट्रक जब बैटरी से चलेंगे तो उससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा और सस्ते दाम पर सामान को एक जगह से दूसरी जगह भी पहुंचाया जा सकेगा। उनका कहना था कि सडक़ें अच्छी बन गई हैं और इसके कारण दिल्ली से देहरादून की दूरी दो घंटे में, दिल्ली से जयपुर तीन घंटे में और दिल्ली से अमृतसर चार घंटे में पहुंचा जा सकता है। इससे परिवहनआसान हो रहा है। सडक़ निर्माण में भी क्रांति आ रही है और किसानों के पराली जैसे बेकार उत्पादों का प्रयोग सडक़ बनाने में किया जा रहा है।
श्री गडकरी ने इस क्रांति से किसानों को हो रहे फायदे का जिक्र करते हुए कहा मैं भी किसान हूं। हरियाणा के किसान बेहतरीन काम कर रहे हैं। किसान अन्नदाता हैं। अब हमने तय किया है कि किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं रहेगा। किसान ऊर्जादाता, ईंधनदाता, कोलतारदाता, विटमिनदाता, ईंधनदाता और हाइड्रोजन प्रदाता भी बनेगा। किसान को अब पराली जलानी नहीं पड़ेगा बल्कि उसे बिटमिन में मिलाकर सडक़ का निर्माण किया जाएगा। नागपुर-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहले एक किलोमीटर सडक़ का निर्माण पराली को बिटमिन में मिलाकर सडक़ बनाया गया है। इस तरह की 400 परियोजनाएं आ रही हैं। एक किलोमीटर की इस सडक़ को परीक्षण में बहुत अच्छा पाया गया है। अब पराली जलाई नहीं जाएगी बल्कि उसका इस्तेमाल आने वाले दिनों में सडक़ निर्माण के लिए किया जाएगा।



