शैक्षणिक भ्रमण ने खोला ऐतिहासिक धरोहरों का खजाना; बहुद्देशीय स्कूल के बच्चों ने जगन्नाथ पूरी की ऐतिहासिक यात्रा की
जगन्नाथ पूरी का ऐतिहासिक अनुभव , भविष्य के लिए ज्ञान का खजाना संजोकर लौटे खम्हरिया स्कूल के छात्र: मोमिन

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। बहुद्देशीय उच्चतर माध्यमिक शाला खम्हरिया के छात्रों ने इस सप्ताह अपनी शैक्षणिक यात्रा के तहत ओडिशा के जगन्नाथपुरी का दौरा किया। इस भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने न केवल ऐतिहासिक स्थलों की सैर की, बल्कि ज्ञानवर्धक जानकारी हासिल की, जो उनके शैक्षिक जीवन को और भी समृद्ध बनाएगी।
भ्रमण के दौरान छात्रों ने गोल्डन बीच की शांतिपूर्ण लहरों के साथ समय बिताया, जहां उन्होंने समुद्र तट पर प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लिया। साथ ही चंद्रभागा और कोणार्क सूर्य मंदिर की यात्रा ने उन्हें भारतीय संस्कृति, वास्तुकला और इतिहास की गहरी समझ दी। छात्रों ने कोणार्क के सूर्य मंदिर की वास्तुकला को ध्यान से देखा और उसके ऐतिहासिक महत्व को समझने की कोशिश की। हीराकुंड जलाशय की यात्रा ने भी छात्रों को जल प्रबंधन और पर्यावरण के महत्व के बारे में जानने का अवसर दिया। यहां उन्होंने जलाशय की विशालता और इसके पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की, जो उनके ज्ञान के दायरे को और विस्तारित करेगा।।संचालक अहमद मोमिन ने इस यात्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह भ्रमण हमारे विद्यार्थियों के लिए एक अमूल्य अनुभव साबित हुआ है। हम चाहते हैं कि हमारे छात्र न केवल किताबों में पढ़ें, बल्कि असल दुनिया में जाकर ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों से सीखें। यही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य है। उन्होंने आगे कहा कि हमारा यह प्रयास है कि हमारे छात्रों को भविष्य में उत्कृष्ट नागरिक और जिम्मेदार समाजसेवी बनने की प्रेरणा मिले, जो अपने देश की धरोहरों का सम्मान करें और समाज की बेहतरी में अपना योगदान दें। शाला के प्राचार्य बलराम यादव ने भी इस भ्रमण के महत्व पर बात करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण छात्रों को नई ऊर्जा और प्रेरणा देते हैं। यह अनुभव न केवल उनके शैक्षिक विकास में सहायक होता है, बल्कि उनके मानसिक और बौद्धिक विकास को भी बढ़ावा देता है। हमारे छात्रों ने इस यात्रा से जो ज्ञान और अनुभव प्राप्त किया है, वह उनके पूरे जीवन में उनके मार्गदर्शक के रूप में रहेगा। इस शैक्षणिक यात्रा में स्कूल के शिक्षकों का भी अहम योगदान रहा। राजेश कुमार, श्रीमती एस ठाकुर, अल्का मैडम, श्रेया यादव, आर दानिश, नागेश्वरी कैवर्त, हेमा ठाकुर, सुलोचना ठाकुर, केपी वस्त्रकार, कन्हैया साहू सहित सभी शिक्षकों ने छात्रों को इस यात्रा के दौरान मार्गदर्शन दिया और उन्हें ऐतिहासिक स्थलों के बारे में गहरी जानकारी दी। यात्रा में छात्रों के पालकों का भी अहम योगदान था, जिनमें लक्ष्मी छेदी साहू, खिलेश्वर साहू, मनीष कुमार सहित अन्य पालक शामिल थे। उनका सहयोग इस यात्रा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण रहा। भ्रमण के बाद विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह यात्रा हमारे जीवन का सबसे शानदार अनुभव रही। हमने जितना कुछ भी इस यात्रा से सीखा, वह हमारी किताबों से कहीं अधिक मूल्यवान था। इस शैक्षणिक भ्रमण ने न केवल छात्रों को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों से अवगत कराया, बल्कि उन्हें यह समझने का मौका भी दिया कि शिक्षा केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि असल दुनिया से सीखी जा सकती है। यह यात्रा उनके जीवन के सबसे प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक अनुभवों में से एक साबित होगी।



