माघ गुप्त नवरात्रि व्रत से भक्तों की होती है इच्छाएं पूरी

आज से गुप्त नवरात्र शुरू हो रहा है, माघ गुप्त नवरात्रि में देवी मां की 10 महाविद्याओं की गुप्त रूप से उपासना की जाती है। इस दौरान भक्त श्रद्धा भाव से माता रानी की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में नवरात्रि को बहुत ही खास माना जाता है। नवरात्रि का व्रत साल में चार बार रखा जाता है, जिसमें से दो बार प्रत्यक्ष और दो बार गुप्त नवरात्रि आती हैं। जहां प्रत्यक्ष नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है वहीं गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की गुप्त रूप से पूजा की जाती है। इसलिए माघ में आने वाले नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।
गुप्त नवरात्रि के दैरान इन दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। दस महाविद्याएं देवी इस प्रकार से हैं- काली, तारा, छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी या कमला। पंडितों के अनुसार देवी मां की इन 10 महाविद्याओं की पूजा करने से मनुष्य को विशेष सिद्धियां प्राप्त होती हैं और जीवन के सभी परेशानियों से छुटकारा मिलता है।
पंडितों के अनुसार मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र, सिंदूर, केसर, कपूर, जौ, धूप,वस्त्र, दर्पण, कंघी, कंगन-चूड़ी, सुगंधित तेल, बंदनवार आम के पत्तों का, लाल पुष्प, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, सुपारी साबुत, हल्दी की गांठ और पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, चौकी, रोली, मौली, पुष्पहार, बेलपत्र, कमलगट्टा, जौ, बंदनवार, दीपक, दीपबत्ती, नैवेद्य, मधु, शक्कर, पंचमेवा, जायफल, जावित्री, नारियल, आसन, रेत, मिट्टी, पान, लौंग, इलायची, कलश मिट्टी या पीतल का, हवन सामग्री, पूजन के लिए थाली, श्वेत वस्त्र, दूध, दही, ऋतुफल, सरसों सफेद और पीली, गंगाजल इत्यादि का इस्तेमाल किया जाता है।
गुप्त नवरात्रि के दौरान तांत्रिक और अघोरी मां दुर्गा की आधी रात में पूजा करते हैं। मां दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित कर लाल रंग का सिंदूर और सुनहरे गोटे वाली चुनरी अर्पित की जाती है। इसके बाद मां के चरणों में पूजा सामग्री को अर्पित किया जाता है। मां दुर्गा को लाल पुष्प चढ़ाना शुभ माना जाता है। माघ गुप्त नवरात्रि 30 जनवरी से शुरू होगी। गुप्त नवरात्रि का समापन 7 फरवरी को होगा। माघ की यह नवरात्रि शक्ति उपासना के लिए बहुत श्रेष्ठ मानी जाती है। माघ गुप्त नवरात्रि में साधतक देवी मां की 10 महाविद्याओं की गुप्त रूप से साधना करते हैं। शारदीय नवरात्रि में किए जाने वाले अधिकांश अनुष्ठान और विधि-विधानों का पालन माघ गुप्त नवरात्रि के समय भी किया जाता है। घटस्थापना मुहूर्त माघ गुप्त नवरात्रि में भी किया जाता है।
पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 29 जनवरी को शाम 6 बजकर 5 मिनट पर शुरू हुआ, प्रतिपदा तिथि समाप्त 30 जनवरी को शाम 4 बजकर 10 मिनट पर होगा। घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 30 जनवरी को सुबह 9 बजकर 41 मिनट से सुबह 10 बजकर 59 मिनट तक रहा। वहीं घटस्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 29 से प्रारंभ हुआ और समाप्त दोपहर 1 बजकर 14 मिनट तक रहा। बता दें कि नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है, जिसे घटस्थापना के नाम से भी जाना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा की 10 महाविद्या प्रकट हुईं थी। माघ गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी शक्ति के 32 अलग-अलग नामों का जाप, दुर्गा सप्तशती , देवी महात्म्य और श्रीमद्-देवी भागवत जैसे धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने से सभी परेशानियां दूर होती है और जीवन में सुख शांति आती है। पंडितों के अनुसार गुप्त नवरात्रि में गई साधना जन्मकुंडली के समस्त दोषों को दूर करने वाली और धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष देने वाली होती है।
प्रत्यक्ष नवरात्रि में मां भगवती की पूजा जहां माता के ममत्व के रूप में की जाती है तो वहीं गुप्त नवरात्रि में देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा शक्ति रूप में की जाती है। शास्त्रों के अनुसार गुप्त नवरात्रि में देवी साधना किसी को बता कर नहीं की जाती है इसलिए इन दिनों को नाम ही गुप्त दिया गया है। इन नवरात्रि में देवी साधना से शीघ्र प्रसन्न् होती हैं और मनोवांछित फल प्रदान करती हैं।



