छत्तीसगढ़

यातायात नियमों का पालन ही जीवन को बनाएगा सुरक्षित और खुशहाल: बीईओ एसआर. टंडन

सडक़ सुरक्षा पर गूंजे पक्ष विपक्ष के तर्क - आत्मानंद स्कूल सीपत सहित आठ स्कूलों के बच्चों का शानदार प्रदर्शन , विजेताओं ने बढ़ाया मान

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर के दिशा-निर्देश में विकासखंड स्तर पर सडक़ सुरक्षा–जीवन रक्षा विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन शुक्रवार को मस्तूरी के बीआरसी भवन में हुआ। इस प्रतियोगिता में विकासखंड मस्तूरी के विभिन्न शासकीय हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सडक़ सुरक्षा से जुड़े नारे ‘हमर सुरक्षा हमर हाथ’ और ‘यातायात नियमों का पालन से ही जीवन होगा सुरक्षित और खुशहाल’ की थीम के साथ हुई। इस अवसर पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी मस्तूरी एसआर. टंडन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यातायात नियमों का पालन करना केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जीवन रक्षा का सबसे बड़ा मंत्र है। सडक़ पर सजगता और अनुशासन ही हमारे बच्चों, परिवार और समाज को सुरक्षित बना सकता है। उन्होंने बच्चों को यातायात संबंधी सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया और उनसे शपथ भी दिलवाई कि वे स्वयं नियमों का पालन करेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।
वाद-विवाद प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल के रूप में प्राचार्यगण उपस्थित रहे। प्रतियोगिता में शासकीय मिनीमाता उच्चतर माध्यमिक शाला टिकारी , शासकीय स्कूल दर्रीघाट , शासकीय स्कूल बूढ़ीखार , शासकीय स्कूल मल्हार , शासकीय उमा शाला लोहरसी , आत्मानंद स्कूल सीपत , शासकीय स्कूल मस्तूरी , शासकीय स्कूल जोन्धरा के छात्र-छात्राओं ने पक्ष और विपक्ष की भूमिका निभाते हुए भाग लिया। इन विद्यालयों के विद्यार्थियों ने प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
विशेष उपलब्धि के रूप में शासकीय मिनीमाता उच्चतर माध्यमिक शाला टिकारी के छात्र ने जिला स्तरीय सडक़ सुरक्षा वाद-विवाद प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त किया और संभाग स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित हुआ। कार्यक्रम में प्राचार्य काशीराम रजक, श्रीमती मंजू प्रभा मिंज, श्रीमती शुभ्रा रानी चतुर्वेदी, संजय दुबे, शानुज सोनी, साक्षर भारत मस्तूरी के बीपीओ राजेश सिंह क्षत्री, श्रीमती कंचन वर्मा, नवल किशोर यादव, सुनील चौधरी, श्रीमती रंजीता जांगड़े, चंद्रकुमार चंद्राकर, सहित अनेक प्राचार्य, व्याख्याता, शिक्षक शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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