छत्तीसगढ़

धान बेचने को भटक रहे किसान, भाजपा सरकार बनी किसानों के लिए आफत : विधायक लहरिया

जयरामनगर धान खरीदी केंद्र निरीक्षण के दौरान खुलकर बोले मस्तूरी विधायक; टोकन व्यवस्था, लिमिट और रकबा कटौती पर सरकार को बताया जिम्मेदार , तैयारियां विफल, किसान परेशान और व्यवस्था चरमराई

सीपत (हिमांशु गुप्ता)। मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया ने ग्राम जयरामनगर स्थित धान खरीदी केंद्र का निरीक्षण कर किसानों से सीधे संवाद किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने धान खरीदी व्यवस्था में व्याप्त गंभीर अव्यवस्थाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला।
विधायक श्री लहरिया ने कहा कि आज भी किसान टोकन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। जिस तरह से खरीदी की प्रक्रिया चल रही है, उसमें अंतिम तिथि तक सभी किसानों से धान खरीदी कर पाना असंभव प्रतीत होता है। भाजपा की विष्णुदेव साय सरकार में धान खरीदी की पूरी व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है, जो सीधे-सीधे किसानों के जीवन से खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि धान खरीदी की अव्यवस्था अब किसानों की जान पर बन आई है। महासमुंद जिले में टोकन न मिलने से एक किसान द्वारा आत्महत्या का प्रयास किया जाना, इस बात का प्रमाण है कि सरकार की तैयारियां कितनी नाकाम और असंवेदनशील हैं। अपनी ही उपज बेचने के लिए किसान लगातार समितियों और कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।विधायक लहरिया ने बताया कि वर्तमान में समितियों में 70 प्रतिशत ऑनलाइन और 30 प्रतिशत ऑफलाइन टोकन का जो नियम बनाया गया है, वह व्यवहारिक नहीं है। ऑफलाइन टोकन के लिए भी किसानों को कई-कई दिनों तक सोसायटियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि ऑनलाइन और ऑफलाइन टोकन की व्यवस्था 50-50 प्रतिशत की जाए, जिससे किसानों को राहत मिल सके। उन्होंने आगे कहा कि धान खरीदी देर से शुरू होने और समितियों में खरीदी लिमिट तय किए जाने के कारण बहुत कम मात्रा में धान की खरीदी हो पा रही है।
अधिकांश समितियों में लिमिट कम होने से किसान भारी चिंता में हैं और वर्तमान खरीदी सीजन में सभी किसानों का धान खरीदा जाना संभव नहीं दिख रहा। इस स्थिति में किसानों के हित में खरीदी की अंतिम तिथि बढ़ाई जाना आवश्यक है।।श्री लहरिया ने भाजपा सरकार की नीतियों को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि रकबा कटौती की समस्या से किसान बुरी तरह जूझ रहे हैं और तहसील कार्यालयों एवं पटवारियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। यदि सरकार वास्तव में किसान हितैषी है, तो उसे प्रतिदिन खरीदी लिमिट बढ़ानी चाहिए तथा एग्रीटेक पोर्टल में पंजीकृत सभी किसानों का संपूर्ण धान खरीदी सुनिश्चित करनी चाहिए।

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